कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई, 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

  • विधेयक: इसके लिए संसद में ‘सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया जाएगा।
  • उद्देश्य: मामलों के बढ़ते बोझ और लंबित मुकदमों (Pendency) को कम करना और न्याय वितरण में तेजी लाना।
  • वित्तीय प्रावधान: अतिरिक्त न्यायाधीशों के वेतन, स्टाफ और बुनियादी ढांचे का खर्च भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से वहन किया जाएगा। 

ऐतिहासिक विकासक्रम (न्यायाधीशों की संख्या)

संविधान का अनुच्छेद 124 संसद को यह शक्ति देता है कि वह समय-समय पर न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करे। स्वतंत्रता के बाद से यह संख्या इस प्रकार बदली है:

वर्षन्यायाधीशों की कुल संख्या (CJI सहित)
19508 (प्रारंभिक संख्या)
195611
196014
197718
198626
200831
201934
2026 (प्रस्तावित)38

नियुक्ति और पात्रताएं

  • नियुक्ति: प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर के तहत वारंट द्वारा की जाती है।
  • पात्रता:
    • भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
    • कम से कम 5 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय (High Court) का न्यायाधीश रहा हो, अथवा
    • कम से कम 10 वर्ष तक उच्च न्यायालय में अधिवक्ता (Advocate) रहा हो, अथवा
    • राष्ट्रपति की दृष्टि में एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता (Distinguished Jurist) हो।
  • तदर्थ (Ad-hoc) न्यायाधीश: संविधान में आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को ‘तदर्थ न्यायाधीश’ के रूप में और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी कार्य करने के लिए बुलाने का प्रावधान है।

सेवानिवृत्ति: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।

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