संसद ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 पारित किया

राज्यसभा ने 11 अगस्त, 2026 को ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पारित किया, जिसके तहत देशभर के विभिन्न अधिकरणों (Tribunals) के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन के लिए राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (National Tribunal Commission—NTC) की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक 10 अगस्त, 2026 को लोकसभा द्वारा पारित किया जा चुका था।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

यह विधेयक ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को निरस्त कर उसके स्थान पर नया कानून लाने का प्रयास करता है।

इसका उद्देश्य विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति एवं सेवा शर्तों तथा अधिकरणों के प्रशासन और कार्यप्रणाली में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। 

राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC): विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC) की स्थापना का प्रस्ताव है। NTC में 2 न्यायिक सदस्य और 2 तकनीकी सदस्य होंगे। आयोग का अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश में से होगा। आयोग के अध्यक्ष या न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति से पहले केंद्र सरकार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करना होगा।

NTC अधिकरणों में नियुक्तियों को पारदर्शी, स्वतंत्र और योग्यता-आधारित (Merit-based) बनाने का कार्य करेगा।

सदस्यों की योग्यता: न्यायिक सदस्य के लिए  किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश के रूप में कार्य किया होना चाहिए। तकनीकी सदस्य हेतु  व्यक्ति में क्षमता, सत्यनिष्ठा और प्रतिष्ठा होनी चाहिए तथा लोक प्रशासन, वित्त, कानून, लेखांकन, बैंकिंग, प्रबंधन या प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कम-से-कम 25 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।

NTC के प्रमुख कार्य: विधेयक की धारा 4 आयोग को निम्नलिखित शक्तियाँ प्रदान करती है:

  • खोज सह चयन समिति के माध्यम से चयन प्रक्रिया आयोजित करना।
  • अधिकरणों के प्रदर्शन की समीक्षा करना।
  • अधिकरण के सदस्यों के विरुद्ध जांच की निगरानी करना।
  • राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड (National Tribunals Data Grid) का रखरखाव करना।

राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड

National Tribunals Data Grid इस कानून के अंतर्गत आने वाले अधिकरणों से संबंधित मामलों की जानकारी के केंद्रीय भंडार के रूप में कार्य करेगा।

अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

विधेयक अधिकरणों के अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction) में कोई बदलाव नहीं करता है।

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