एस्ट्रोबेस ने भारत की पहली प्राइवेट रियूज़ेबल रॉकेट इंजन टेक्नोलॉजी पेश की
7 अगस्त को बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष कंपनी Astrobase ने भारत का पहला निजी तौर पर विकसित 800 kN फ़ुल-फ़्लो स्टेज़्ड कंबशन (FFSC) LOX-मीथेन रॉकेट इंजन पेश किया। इस इंजन का नाम EVEREST रखा गया है।
- EVEREST को Astrobase ने विकसित किया है। इसके सफल विकास के साथ Astrobase दुनिया की ऐसी चौथी वाणिज्यिक कंपनी और भारत को ऐसा इंजन विकसित करने वाला चौथा देश बनाने वाली कंपनी बन गई है।
- कंपनी अपने पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान (Reusable Launch Vehicle) की पहली उड़ान दिसंबर 2028 में करने का लक्ष्य रखती है।
- इंजन का हॉट-फायर परीक्षण (Hot-fire Test) आने वाले महीनों में शुरू होने वाला है।
FFSC इंजन क्या है?
फ़ुल-फ़्लो स्टेज़्ड कंबशन (FFSC) रॉकेट इंजन की एक अत्यधिक जटिल तकनीक है।
- इसमें ईंधन (Fuel) और ऑक्सीडाइजर (Oxidiser) दोनों को दहन कक्ष में भेजने से पहले पूरी तरह गैस में बदला जाता है।
- इससे इंजन को अधिक दहन-कक्ष दबाव (Chamber Pressure) पर काम करने की क्षमता मिलती है।
- इससे ईंधन से अधिक दक्षता प्राप्त की जा सकती है।
- पारंपरिक इंजन संरचनाओं की तुलना में कुछ तापीय दबाव को भी कम किया जा सकता है।
वर्तमान में SpaceX का Raptor एकमात्र FFSC इंजन है, जिसने सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में उड़ान भरी है।
EVEREST की विशेषताएं
- इंजन क्षमता: 800 kN
- ईंधन: LOX-Methane
- तकनीक: Full-Flow Staged Combustion
- उपयोग: पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान
- पहली उड़ान का लक्ष्य: दिसंबर 2028
भारत के लिए महत्व
भारत की वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में वर्तमान हिस्सेदारी 2% से भी कम है। ऐसे में EVEREST जैसे स्वदेशी रॉकेट इंजन का विकास महत्वपूर्ण है।
स्वदेशी प्रणोदन तकनीक (Indigenous Propulsion Technology) और बड़े स्तर पर विकसित की जा सकने वाली लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर भारत को तेजी से बढ़ते वैश्विक सैटेलाइट लॉन्च बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।



