सुप्रीम कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के खतरे को रोकने के लिए नियम कड़े किए
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) और साइबर धोखाधड़ी या डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बैंक खातों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure—SOP) तैयार कर उसे प्रसारित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और बैंकों को भी शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने, धोखाधड़ी से ठगा गया धन शीघ्र वापस दिलाने और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने RBI को इस SOP की प्रतियां सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को शिकायत निवारण (Grievance Redressal) और धन वापसी (Money Restoration) मॉड्यूल को शीघ्र अपनाने और लागू करने के लिए कहा।
न्यायालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इन दोनों मॉड्यूल को संचालित करने तथा इनके बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों से कहा गया कि वे अधीनस्थ न्यायालयों को इन मॉड्यूल की उपलब्धता के बारे में अवगत कराएं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की संख्या 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 हो गई तथा 2026 के पहले छह महीनों में यह 16,377 रही। सुप्रीम कोर्ट ने इन आंकड़ों को “निश्चित रूप से उत्साहजनक” बताया।
डिजिटल अरेस्ट का तरीका
धोखाधड़ी करने वाले आमतौर पर संभावित पीड़ित को फोन करके बताते हैं कि उसने कोई पार्सल भेजा है या उसे कोई पार्सल मिलने वाला है, जिसमें अवैध सामान, ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या अन्य प्रतिबंधित वस्तुएँ हैं।
कभी-कभी वे यह भी बताते हैं कि पीड़ित का कोई करीबी व्यक्ति किसी अपराध या दुर्घटना में शामिल पाया गया है और उनकी हिरासत में है। इसके बाद “मामला खत्म करने” के लिए पैसे की मांग की जाती है।
कुछ मामलों में, अनजान पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” में रखा जाता है और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें Skype या अन्य वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार वीडियो पर उपलब्ध रहने के लिए मजबूर किया जाता है।
धोखाधड़ी करने वाले अक्सर पुलिस थानों और सरकारी कार्यालयों जैसे दिखने वाले स्टूडियो तैयार करते हैं और लोगों को वास्तविक अधिकारी का विश्वास दिलाने के लिए वर्दी पहनते हैं।
साइबर अपराधियों की नई तकनीकें
डिजिटल ठग अपनी कार्यप्रणाली में लगातार बदलाव कर रहे हैं। वे—
- SIM Box के माध्यम से कॉल रूट करते हैं, जिससे उनकी वास्तविक लोकेशन छिप जाती है और कॉल भारतीय नंबर जैसी दिखाई देती है।
- अलग-अलग राज्यों में कई म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल करके धन को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करते हैं।
- वीडियो कॉल के दौरान डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके पीड़ितों को धोखा देते हैं।
- अपनी पहचान और स्थान को छिपाने की कोशिश करते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए उन्हें पकड़ना कठिन हो जाता है।
इस प्रकार, साइबर अपराधी अक्सर उनका पीछा करने वाली जांच एजेंसियों से एक कदम आगे दिखाई देते हैं।
प्रमुख उपाय
CBI का ‘ABHAY’ हेल्पबॉट: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ABHAY (AI-Based Helpbot for Authentication of CBI notices) लॉन्च किया है। यह एक AI-आधारित हेल्पबॉट है, जिसे CBI के नोटिस की वास्तविकता की जांच करने के लिए विकसित किया गया है। यह नागरिकों को बढ़ते साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट घोटालों से बचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया अपनी तरह का पहला रियल-टाइम नोटिस सत्यापन तंत्र है।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C): भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) गृह मंत्रालय (MHA) के अंतर्गत कार्य करता है और देश में साइबर अपराध से निपटने से संबंधित गतिविधियों के समन्वय का कार्य करता है। गृह मंत्रालय साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए अन्य मंत्रालयों एवं उनकी एजेंसियों, RBI तथा अन्य संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। I4C राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को साइबर अपराध के मामलों की पहचान और जांच के लिए तकनीकी सहायता तथा आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध करा रहा है। I4C ने Microsoft के सहयोग से ऐसी गतिविधियों में शामिल 1,000 से अधिक Skype IDs को ब्लॉक किया है।
इसके अलावा, I4C साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले SIM कार्ड, मोबाइल डिवाइस, म्यूल बैंक खाते को ब्लॉक करने की प्रक्रिया को भी सुगम बना रहा है।
I4C ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Cyberdost’ के माध्यम से साइबर अपराध से बचाव के लिए इन्फोग्राफिक्स, वीडियो और अन्य जागरूकता सामग्री भी जारी की है। यह सामग्री X, Facebook, Instagram आदि प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाती है।
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