बाघ संरक्षण के लिए भारत के प्रयास
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाघ संरक्षण के वैश्विक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत नवंबर 2010 में आयोजित सेंट पीटर्सबर्ग बाघ शिखर सम्मेलन से हुई। भारत सहित 13 बाघ पर्यावास वाले देशों के नेताओं ने वर्ष 2022 तक विश्व में जंगली बाघों की संख्या दोगुनी करने के महत्वाकांक्षी Tx2 लक्ष्य को अपनाया था।
भारत के लिए यह दिवस वैज्ञानिक आधार पर संरक्षण और सतत विकास के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि करता है। यह भारत की उल्लेखनीय संरक्षण उपलब्धियों को भी प्रदर्शित करता है।
आज भारत विश्व की सबसे बड़ी जंगली बाघ आबादी का आश्रय है। विश्व के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं। यह सफलता दशकों से जारी नीतिगत समर्थन, वैज्ञानिक प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता का परिणाम है, जिसने भारत को बाघ संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाया है।
यह उपलब्धि बाघ के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संबंधों पर आधारित है। सदियों से प्राचीन सिक्कों, राजकीय मुहरों और मंदिरों की नक्काशियों में बाघ को शक्ति और संप्रभुता के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। इस विरासत को मान्यता देते हुए सरकार ने वर्ष 1972 में रॉयल बंगाल टाइगर को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया। आज भी बाघ भारत की समृद्ध जैव विविधता, पारिस्थितिक संपदा और साझा प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है।
प्रोजेक्ट टाइगर
प्रोजेक्ट टाइगर भारत सरकार की एक प्रमुख केंद्रीय प्रायोजित योजना है। इसका कार्यान्वयन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (2023) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत 18 बाघ पर्यावास वाले राज्यों में 58 टाइगर रिजर्व स्थापित किए गए हैं। ये रिजर्व लगभग 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.56 प्रतिशत है।
बाघ निगरानी में प्रौद्योगिकी का उपयोग
भारत ने बाघों की निगरानी के प्रत्येक चरण में उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों को शामिल किया है।
बाघों की निगरानी – गहन संरक्षण एवं पारिस्थितिक स्थिति प्रणाली (M-STrIPES) क्षेत्रीय निगरानी के लिए वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली, वैश्विक पैकेट रेडियो सेवा और दूरसंवेदी प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है।
यह मंच क्षेत्रीय आंकड़ों को एक केंद्रीय डेटाबेस में एकीकृत करता है, जिससे वैज्ञानिक विश्लेषण और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी बाघ निगरानी को सशक्त बनाती है।
कैमरा ट्रैप डेटा रिपॉजिटरी एंड एनालिसिस टूल (CaTRAT) कैमरा ट्रैप से प्राप्त चित्रों को स्वतः विभिन्न प्रजातियों के आधार पर वर्गीकृत करता है।
ExtractCompare बाघों की विशिष्ट धारियों के आधार पर उनकी व्यक्तिगत पहचान करता है।
ये सभी तकनीकें मिलकर बाघों की संख्या के आकलन की सटीकता और विश्वसनीयता को बढ़ाती हैं।
इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायन्स
इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायन्स (आईबीसीए) बिग कैट्स पर्यावास वाले 95 देश और साझेदार देशों, वैज्ञानिक संस्थानों तथा संरक्षण संगठनों का एक वैश्विक गठबंधन है।
यह गठबंधन बाघ, सिंह, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा सहित सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए सहयोग को बढ़ावा देता है।
12 मार्च, 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके गठन को मंजूरी दी थी। इसका सचिवालय भारत में स्थित है।
भारत के बाघ संरक्षण के वैश्विक अनुभव के आधार पर यह गठबंधन बड़ी बिल्लियों और उनके पर्यावासों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करता है।
ग्लोबल टाइगर फोरम
वैश्विक बाघ मंच (जीटीएफ) विश्व का एकमात्र अंतर-सरकारी संगठन है, जो विशेष रूप से बाघ संरक्षण के लिए समर्पित है।
इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसमें 13 बाघ पर्यावास वाले देश शामिल हैं।
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