“सफ़ेद सोना: भारत की कपास की कहानी

कपास भारत में उगाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसलों में से एक है। यह वैश्विक फाइबर उत्पादन का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा है।

  • यह फसल लगभग 60 लाख कपास किसानों की आजीविका का आधार है।
  • इसके अतिरिक्त, कपास प्रसंस्करण और व्यापार जैसी संबंधित गतिविधियों में लगे लगभग 4-5 करोड़ लोगों को भी रोजगार प्रदान करती है।
  • वस्त्रों के अलावा, कपास फाइबर, धागे, कपड़े और परिधानों के निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा अर्जित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • भारत में इसके आर्थिक महत्व के कारण इसे “सफेद सोना (White Gold)” भी कहा जाता है।

भारत का कपास सेक्टर

  • भारत का कपास क्षेत्र जैव विविधता, व्यापक खेती और मजबूत वस्त्र प्रणाली के कारण समृद्ध एवं गतिशील है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) संचालन, कपास उत्पादकता मिशन (Mission for Cotton Productivity) और कस्तूरी कॉटन भारत (Kasturi Cotton Bharat) जैसी नीतिगत पहलों से इस क्षेत्र को मजबूती मिल रही है।
  • प्रौद्योगिकी अपनाने, बाजार सुधार और गुणवत्ता संवर्धन के प्रयास कपास क्षेत्र के भविष्य को आकार दे रहे हैं।

भारत में कपास उद्योग का विकास

  • आधुनिक कपास उद्योग ने 19वीं शताब्दी में आकार लेना शुरू किया, जब कोलकाता, मुंबई और अहमदाबाद में कपड़ा मिलों की स्थापना हुई।
  • अहमदाबाद को “भारत का मैनचेस्टर (Manchester of India)” कहा जाता है।

कपास की प्रजातियाँ

भारत विश्व का एकमात्र देश है जहाँ कपास की सभी चार मान्यता प्राप्त प्रजातियों की खेती की जाती है:

  1. G. Arboreum – एशियाई कपास (Asian Cotton)
  2. G. Herbaceum – एशियाई कपास (Asian Cotton)
  3. G. Barbadense – मिस्र का कपास (Egyptian Cotton)
  4. G. Hirsutum – अमेरिकी अपलैंड कपास (American Upland Cotton)
  • इनमें G. Hirsutum भारत में उत्पादित हाइब्रिड कपास का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा है।
  • वर्तमान में देश में खेती की जा रही सभी Bt कपास संकर किस्में (Bt Cotton Hybrids) इसी प्रजाति से संबंधित हैं।

Bt कपास (Bt Cotton)

  • Bt का अर्थ Bacillus thuringiensis है, जो प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक मृदा जीवाणु (Soil Bacterium) है।
  • Bt कपास एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (Genetically Modified-GM) कपास फसल है, जिसमें इस जीवाणु के जीन शामिल किए जाते हैं।
  • ये जीन कपास की फसल को बॉलवर्म (Bollworms) के प्रति प्रतिरोध प्रदान करते हैं, जो कपास की खेती को प्रभावित करने वाले प्रमुख कीटों में से एक है।
  • भारत में 2002 में व्यावसायिक रूप से पेश किए जाने के बाद Bt कपास ने:
    • बॉलवर्म के प्रकोप को काफी कम किया।
    • कीटनाशकों के छिड़काव की आवश्यकता को कम किया।
    • अधिक उत्पादन और कम कीट नियंत्रण लागत के संयुक्त प्रभाव से किसानों की आय में सुधार करने में योगदान दिया।

कपास का उत्पादन क्षेत्र

  • भारत में कपास का उत्पादन मुख्य रूप से 9 प्रमुख राज्यों में केंद्रित है, जिन्हें 3 विशिष्ट कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों (Agro-ecological Zones) में विभाजित किया गया है।
  • भारत कपास की खेती के क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) के मामले में विश्व में प्रथम स्थान पर है।
  • भारत में लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है।
  • कपास के उत्पादन और खपत, दोनों में भारत विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है।

कपास का व्यापार एवं उत्पादन की इकाई

  • कपास का उत्पादन आमतौर पर बेल (Bale) में दर्ज किया जाता है, जो कपास व्यापार में उपयोग की जाने वाली मानक इकाई है।
  • 1 बेल = 170 किलोग्राम
  • 2024-25 में भारत ने अनुमानतः 18 लाख बेल (0.31 मिलियन मीट्रिक टन) कपास का निर्यात किया।
  • यह कुल वैश्विक कपास निर्यात का लगभग 3.37 प्रतिशत है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली कपास किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के रूप में कार्य करती है।
  • सरकार ने कपास की MSP खरीद प्रक्रिया को संचालित करने की जिम्मेदारी भारतीय कपास निगम (Cotton Corporation of India-CCI) को सौंपी है।

कपास उत्पादकता मिशन

  • देशभर में कपास उत्पादन को मजबूत करने के लिए 2025-26 में पाँच वर्षीय कपास उत्पादकता मिशन (Mission for Cotton Productivity) शुरू किया गया।
  • इस मिशन के तहत अतिरिक्त लंबा रेशा (Extra Long Staple-ELS) कपास पर विशेष जोर दिया गया है।
  • इन प्रयासों को उन्नत प्रजनन तकनीकों (Advanced Breeding) और जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) उपकरणों के माध्यम से समर्थन प्रदान किया जाएगा।

Source: PIB

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