भारत ने 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए पहली डेंगू वैक्सीन को मंज़ूरी दी
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने जापान की टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया की QDENGA (TAK-003) को बाजार में उपयोग (Market Authorisation) की मंजूरी प्रदान की है।
- इसके साथ ही QDENGA भारत में स्वीकृत डेंगू की पहली वैक्सीन बन गई है।
- इस वैक्सीन को 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों में डेंगू की रोकथाम के लिए मंजूरी दी गई है।
- QDENGA एक लाइव-अटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट (Live-attenuated Tetravalent) वैक्सीन है, जिसे डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- इसे दो खुराक के रूप में तीन महीने के अंतराल पर त्वचा के नीचे लगाया जाता है।
- इस वैक्सीन को यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम, ब्राज़ील, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना सहित 40 से अधिक देशों में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेंगू के अधिक बोझ वाले देशों में इसे डेंगू नियंत्रण की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में उपयोग करने की अनुशंसा की है।
- यह वैक्सीन लक्षणयुक्त डेंगू (Symptomatic Dengue) तथा गंभीर डेंगू, जिसके कारण अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ सकती है, दोनों के जोखिम को कम करने में सहायता करती है।
डेंगू (Dengue) के बारे में
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो डेंगू वायरस (DENV) के कारण होता है।
- यह संक्रमित एडीज़ (Aedes) मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है।
- यह रोग उष्णकटिबंधीय (Tropical) एवं उपोष्णकटिबंधीय (Subtropical) क्षेत्रों में समशीतोष्ण (Temperate) क्षेत्रों की तुलना में अधिक सामान्य है।
- वर्तमान में डेंगू का कोई विशिष्ट उपचार (Specific Treatment) उपलब्ध नहीं है। इसका उपचार मुख्यतः लक्षणों एवं दर्द के प्रबंधन (Pain Management) के माध्यम से किया जाता है।
लाइव-अटेन्यूएटेड वैक्सीन के बारे में
- लाइव-अटेन्यूएटेड वैक्सीन में रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु या वायरस का कमज़ोर रूप प्रयोग किया जाता है।
- चूँकि ये वैक्सीन प्राकृतिक संक्रमण के समान प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करती हैं, इसलिए ये मजबूत एवं दीर्घकालिक प्रतिरक्षा प्रदान करती हैं।
- अधिकांश लाइव वैक्सीन की एक या दो खुराक ही लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं।
- इनमें जीवित लेकिन कमजोर वायरस होने के कारण, कुछ व्यक्तियों को इन्हें लगवाने से पहले चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
- इन वैक्सीनों को शीत श्रृंखला (Cold Chain) में रखना आवश्यक होता है, इसलिए सीमित शीत भंडारण सुविधाओं वाले क्षेत्रों में इनका उपयोग चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
लाइव-अटेन्यूएटेड वैक्सीनों के प्रमुख उदाहरण:
- खसरा, गलसुआ एवं रूबेला (MMR)
- रोटावायरस
- चेचक (Smallpox)
- चिकनपॉक्स (Chickenpox)
- येलो फीवर (Yellow Fever)
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