भारत ने लद्दाख की पुगा घाटी में अपने पहले भूतापीय कुएं चालू किए
उपराज्यपाल श्री वी.के. सक्सेना ने लद्दाख के पुगा वैली में भारत के पहले और सबसे गहरे दो भू-तापीय (Geothermal) कुओं का उद्घाटन किया। इन कुओं का निर्माण ONGC एनर्जी सेंटर द्वारा किया गया है। यह भारत के पहले भू-तापीय विद्युत संयंत्र (Geothermal Power Plant) की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
ये दोनों कुएँ 1000 मीटर गहरे हैं और इन्हें 14,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर खोदा गया है। इससे लद्दाख को नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) आधारित स्वच्छ ऊर्जा केंद्र (Clean Energy Hub) बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।
ये दोनों कुएँ 1 मेगावाट (MW) क्षमता वाली पायलट भू-तापीय विद्युत परियोजना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह परियोजना भारत की पहली प्रदर्शन-स्तर (Demonstration Scale) की भू-तापीय बिजली परियोजना होगी।
इन कुओं के सफल निर्माण से भू-तापीय जलाशय (Reservoir) का वैज्ञानिक अध्ययन, बिजली संयंत्र की योजना और भविष्य में लद्दाख में बड़े स्तर पर भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
परियोजना के इंजीनियरों के अनुसार, 400 मीटर की गहराई पर 135°C तापमान दर्ज किया गया है। परीक्षण अभी जारी है और उम्मीद है कि आगे और अधिक तापमान प्राप्त होगा, जिससे 1 मेगावाट की पायलट परियोजना तथा भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा।
भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) क्या है?
- भू-तापीय ऊर्जा पृथ्वी के अंदर मौजूद प्राकृतिक गर्मी या ऊष्मा से प्राप्त होने वाली नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा है।
- पृथ्वी के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के धीरे-धीरे विघटन से लगातार ऊष्मा उत्पन्न होती रहती है।
- इस ऊष्मा का उपयोग बिजली उत्पादन, भवनों को गर्म रखने तथा गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोतों (Hot Springs) में स्नान जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता है।
विश्व में स्थिति
- वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन में दुनिया का सबसे बड़ा देश है।
- इसकी स्थापित क्षमता 3,734 मेगावाट है, जो दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश से लगभग 1,300 मेगावाट अधिक है।
भारत में भू-तापीय ऊर्जा
- भारत सरकार ने राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति, 2025 (National Policy on Geothermal Energy, 2025) जारी की है।
- इस नीति का उद्देश्य 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करना तथा देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
भारत की भू-तापीय क्षमता
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा जारी Geothermal Atlas (2022) के अनुसार, भारत की अनुमानित सैद्धांतिक भू-तापीय ऊर्जा क्षमता लगभग 10,600 मेगावाट है।
- GSI ने पूरे देश में 381 गर्म जल स्रोतों (Hot Springs) का मानचित्रण किया है।
- इनमें से 42 स्थानों को भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन और प्रत्यक्ष ऊष्मा (Direct Heat Applications) के लिए सबसे अधिक संभावनाशील माना गया है।
- इन 42 स्थलों को राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति, 2025 में आगे के अन्वेषण और विकास के लिए संभावित क्षेत्रों के रूप में शामिल किया गया है।
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