आत्मनिर्भर भारत के लिए ‘यूरिया हेतु राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 (NIPU-2026)’
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने उर्वरक विभाग द्वारा प्रस्तावित आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया हेतु राष्ट्रीय निवेश नीति–2026 (National Investment Policy for Urea-2026 for Atmanirbhar Bharat: NIPU-2026) को मंजूरी दी है।
NIPU-2026 के उद्देश्य
- नई नीति का उद्देश्य देशभर में नई गैस-आधारित यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित कर यूरिया क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा देना है।
- NIPU-2026 का लक्ष्य घरेलू यूरिया उत्पादन में वृद्धि करना तथा उर्वरक उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को साकार करना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
- यह नीति नई निवेश नीति (New Investment Policy: NIP)-2012 का स्थान लेती है, जिसने उर्वरक क्षेत्र में ग्रीनफील्ड, ब्राउनफील्ड, विस्तार (Expansion) तथा पुनरुद्धार (Revival) परियोजनाओं में निवेश आकर्षित किया था।
NIPU-2026 की प्रमुख विशेषताएँ
NIP-2012 की तुलना में NIPU-2026 में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- अधिक पारदर्शिता के लिए स्थिर (Fixed) एवं परिवर्ती (Variable) लागतों का पृथक्करण,
- न्यूनतम 12% तथा अधिकतम 16% के रिटर्न ऑन इक्विटी (Return on Equity: RoE) बैंड की शुरुआत, तथा
- विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करने के लिए चार वर्ष बाद प्रचलित विनिमय दरों के आधार पर स्थिर लागतों को भारतीय रुपये में परिवर्तित करने का प्रावधान।
इन सुधारों से नई नीति के अंतर्गत स्थापित प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र पर पूर्ववर्ती नीति की तुलना में ₹250 करोड़ से अधिक की बचत होने की संभावना है।
NIP-2012
- NIP-2012 के अंतर्गत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए, जिनमें चार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा प्रवर्तित संयुक्त उपक्रमों (Joint Ventures) के माध्यम से तथा दो निजी कंपनियों द्वारा स्थापित किए गए।
- हालांकि, NIP-2012 के तहत निवेश की अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।
यूरिया की मांग एवं उत्पादन
- भारत में यूरिया की मांग औसतन लगभग 5% प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है।
- वर्तमान में देश में प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ टन (30 मिलियन टन) यूरिया का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू मांग बढ़कर लगभग 4 करोड़ टन (40 मिलियन टन) हो गई है। इस प्रकार मांग-आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ टन (10 मिलियन टन) यूरिया का आयात किया जाता है।
- वर्तमान में भारत में 33 परिचालित (Operational) यूरिया विनिर्माण इकाइयाँ हैं, जिनकी कुल पुनर्मूल्यांकित/स्थापित उत्पादन क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (LMT) है।
सरकार का मानना है कि NIPU-2026 के माध्यम से स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी, उर्वरक सुरक्षा मजबूत होगी तथा उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को बल मिलेगा।
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