असम के बोरजुली वेटलैंड को ‘बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट’ घोषित किया गया

असम के बोरजुली आर्द्रभूमि (wetland) को जैव विविधता विरासत स्थल (Biodiversity Heritage Site – BHS) अधिसूचित किया गया है। यह भारत के जंगली धान के आनुवंशिक संसाधनों (genetic resources) के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। 

बोरजुली आर्द्रभूमि के बारे में

यह आर्द्रभूमि जंगली धान की एक ऐसी अनूठी किस्म को सहेजने के लिए जानी जाती है, जो बीमारियों और कीटों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (resistant) है। 

जंगली धान की यह प्रजाति, ओराइजा रूफिपोगोन (Oryza rufipogon), आधुनिक समय में उगाए जाने वाले धान यानी ओराइजा सैटिवा (Oryza sativa) की मूल किस्म (progenitor) है। यह कीटों और बीमारियों से लड़ने में सक्षम होने के साथ-साथ बाढ़ और खारेपन को भी सहन कर सकती है। यही विशेषताएं इसे भविष्य की जलवायु-अनुकूल फसलें विकसित करने के लिए एक अत्यंत मूल्यवान आनुवंशिक संसाधन बनाती हैं।

यह मान्यता साल 2022 से असम के सोनितपुर जिले में चलाई जा रही एक विशेष परियोजना की सफलता का परिणाम है, जिसका नाम है—“सोनितपुर जिला, असम में जंगली धान (ओराइज़ा रूफिपोगोन) का इन-सिटु (स्थानीय) संरक्षण और प्रबंधन”। 

जंगली धान की ये प्रजातियां ऐसी नई फसलें तैयार करने के लिए जीनों (genes) का एक अमूल्य स्रोत हैं जो जलवायु परिवर्तन को सहन कर सकें, अधिक पैदावार दें और पोषण के मामले में भी श्रेष्ठ हों।

जैव विविधता विरासत स्थल (BHS) के बारे में

जैव विविधता विरासत स्थल को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37 के तहत मान्यता दी जाती है। इन स्थलों की जैव विविधता बेहद समृद्ध होती है, जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं शामिल हैं:

  • जंगली और घरेलू /कृषि दोनों प्रकार की प्रजातियों की प्रचुरता।
  • उच्च स्थानिकता (high endemism – ऐसी प्रजातियां जो केवल उसी विशेष इलाके में पाई जाती हैं)।
  • दुर्लभ, लुप्तप्राय (threatened) और कीस्टोन प्रजातियां।
  • विकासवादी महत्व रखने वाली प्रजातियां और फसलों के जंगली पूर्वज।
  • जीवाश्म क्षेत्र ।
  • सांस्कृतिक, नैतिक या सौंदर्य संबंधी मूल्य (चाहे वहां लंबे समय से इंसानी आबादी रही हो या नहीं)।

अधिसूचना जारी करने की कानूनी प्रक्रिया

जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 37 (1) के अनुसार, राज्य सरकारें समय-समय पर स्थानीय निकायों (local bodies) के साथ परामर्श करके, जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण ऐसे क्षेत्रों को आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में ‘जैव विविधता विरासत स्थल’ के रूप में अधिसूचित कर सकती हैं।

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