केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘सुमन रोडमैप 2030’ लॉन्च किया
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश भर में मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में व्यापक बदलाव लाने के लिए 29 जून को ‘सुमन रोडमैप 2030’ (SUMAN Roadmap 2030) लॉन्च किया। यह एक व्यापक और भविष्योन्मुखी नीति है, जिसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति को तेज करना है। इस रोडमैप का अनावरण केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन के दौरान किया गया।
जीवन-चक्र दृष्टिकोण और निर्बाध देखभाल
‘सुमन रोडमैप 2030’ साक्ष्य-आधारित (evidence-driven) रणनीति है जो देश भर में समान और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय वास्तविकताओं के साथ जोड़ती है। RMNCHA+N ढांचे पर आधारित यह रोडमैप एक व्यापक ‘जीवन-चक्र दृष्टिकोण’ (life-cycle approach) को अपनाता है। इसके तहत गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान, प्रसव और प्रसवोत्तर (postnatal) अवधि तक के सभी चरणों को शामिल किया गया है। साथ ही, इसे बाल स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण कार्यक्रमों के साथ भी जोड़ा गया है ताकि महिलाओं को हर स्तर पर आसानी से और व्यक्ति-केंद्रित देखभाल मिल सके।
हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान और ट्रैकिंग
इस रोडमैप की एक सबसे बड़ी विशेषता ‘हाई-रिस्क’ (उच्च जोखिम वाली) गर्भावस्था की पहचान, ट्रैकिंग और प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना है। इसके लिए चार महत्वपूर्ण चरणों को चिन्हित किया गया है:
- प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal Care)
- तीसरी तिमाही की देखभाल (Third-trimester Care)
- प्रसव के दौरान की देखभाल (Intrapartum Care)
- प्रसवोत्तर अवधि (Postnatal Period)
इन चरणों पर विशेष नजर रखने से समय पर स्वास्थ्य संबंधी उपाय संभव हो सकेंगे और क्लिनिकल परिणामों में सुधार होगा। इसके अलावा, रोडमैप में परिवहन संबंधी चुनौतियों, आदिवासी व दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य पहुंच, आपातकालीन प्रसूति देखभाल की गुणवत्ता, ‘सुमन पंचायतों’ के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी, और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों का भी समाधान तलाशा गया है।
13 राज्यों के 130 जिलों पर विशेष ध्यान
जिन क्षेत्रों में मातृ और शिशु मृत्यु दर का बोझ सबसे अधिक है, वहां सुधार की गति तेज करने के लिए रोडमैप के तहत 13 उच्च-फोकस वाले राज्यों के 130 जिलों में समयबद्ध उपाय शुरू किया जाएगा। इन चिन्हित राज्यों के लिए एक व्यापक पैकेज का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें ‘गर्भवती महिलाओं के लिए सुमन पैकेज’ (SUMAN Package for Pregnant Women) शामिल है। इसके जरिए शुरुआती पंजीकरण, पूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल मूल्यांकन और प्रसव के बाद अस्पतालों में पर्याप्त समय तक ठहरने (post-partum institutional stay) को बढ़ावा दिया जाएगा।
डिजिटल निगरानी और ‘जननी पोर्टल’
इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और स्थायी परिणामों के लिए कई अत्याधुनिक कदम उठाए जा रहे हैं:
- मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देखभाल के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) विकसित किए जाएंगे।
- शिकायतों के निवारण के लिए एक केंद्रीकृत ‘सुमन कॉल सेंटर’ स्थापित किया जाएगा।
- स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच रेफरल लिंकेज को और मजबूत किया जाएगा।
- ‘जननी पोर्टल’ (JANANI Portal) के माध्यम से मजबूत डिजिटल निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र तैयार किया जाएगा।
मुख्य लक्ष्य: ‘सुमन रोडमैप 2030’ का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण विज़न वर्ष 2030 तक भारत में मातृ मृत्यु दर (MMR) को घटाकर प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना है।
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