थेवा कला (Thewa art)

राजस्थान के प्रतापगढ़ की सदियों पुरानी थेवा कला (Thewa art) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया स्लोवाकिया यात्रा के दौरान वैश्विक मंच पर स्थान मिला, जहां उन्होंने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी (Peter Pellegrini) को थेवा मोटिफ (आकृति) वाले कफ़लिंक्स (cufflinks) भेंट किए।

रंगीन कांच पर सोने की अपनी जटिल नक्काशी के लिए प्रसिद्ध, थेवा भारत के सबसे विशिष्ट पारंपरिक शिल्पों में से एक है। इन कफ़लिंक्स ने उस शिल्प कौशल को प्रदर्शित किया जिसे पीढ़ियों से संजोकर रखा गया है, और एक अंतरराष्ट्रीय दर्शक वर्ग के सामने भारत की समृद्ध कारीगरी विरासत को उजागर किया।

थेवा कला में 23-कैरेट सोने में नाजुक डिज़ाइन तैयार करना और उन्हें बहुरंगी कांच की सतहों पर जड़ना शामिल होता है। पिछले कुछ वर्षों में, यह भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में उभरी है और साथ ही इस शिल्प से जुड़े कारीगरों के लिए आजीविका के अवसर भी उत्पन्न कर रही है। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से शुरू हुई थेवा कला कुशल कारीगरों की पीढ़ियों के माध्यम से सदियों से जीवित है और इसे आज भी भारत के सबसे बेहतरीन पारंपरिक हस्तशिल्पों में से एक माना जाता है।

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