तमिलनाडु में अमोनिया गैस रिसाव की बड़ी त्रासदी

तमिलनाडु में अब तक की सबसे भीषण औद्योगिक अमोनिया गैस रिसाव त्रासदी सामने आई है। तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक निजी सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट (समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई) में हुए इस हादसे में अब तक आठ प्रवासी महिला कामगारों की जान जा चुकी है।

घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) ने विशिष्ट रासायनिक, जैविक और परमाणु (CBN) प्रतिक्रिया टीमों के साथ मिलकर तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत गैस रिसाव पर काबू पाया।

अमोनिया क्या है? (अमेरिकी सीडीसी के अनुसार)

यूएस-सीडीसी (US-CDC) के अनुसार, अमोनिया एक ऐसा रसायन है जो इंसानों और प्रकृति, दोनों द्वारा बनाया जाता है। रासायनिक रूप से यह एक भाग नाइट्रोजन (N) और तीन भाग हाइड्रोजन (H3) से मिलकर बना है। हर साल इंसानों द्वारा बनाई जाने वाली अमोनिया की मात्रा, प्रकृति द्वारा उत्पादित मात्रा के लगभग बराबर होती है। हालांकि, जब अमोनिया पर्यावरण में चिंताजनक स्तर पर पाई जाती है, तो इसकी वजह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इंसानी गतिविधियां ही होती हैं।

मुख्य विशेषताएं और उपयोग:

  • रंग और गंध: अमोनिया एक रंगहीन (colorless) गैस है जिसकी गंध बहुत तीखी होती है। दबाव (प्रेशर) के जरिए अमोनिया गैस को कंप्रेस करके तरल (लिक्विड) में बदला जा सकता है।
  • दैनिक जीवन में उपस्थिति: अमोनिया की गंध से ज्यादातर लोग परिचित हैं क्योंकि इसका उपयोग स्मेलिंग साल्ट (सूंघने वाले नमक), घरेलू क्लीनर और खिड़की साफ करने वाले उत्पादों में किया जाता है। यह पानी में आसानी से घुल जाती है।
  • कृषि में महत्व: इंसानों द्वारा निर्मित कुल अमोनिया का 80 प्रतिशत हिस्सा उर्वरक (Fertilizer) के रूप में उपयोग किया जाता है। इसमें से एक-तिहाई हिस्से को शुद्ध अमोनिया के रूप में सीधे मिट्टी में डाला जाता है।

जीवन के लिए जरूरी:

अमोनिया पौधों, जानवरों और इंसानों के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह पानी, मिट्टी और हवा में पाई जाती है, और जीव-जंतुओं व पौधों के लिए आवश्यक नाइट्रोजन का एक प्रमुख स्रोत है। पर्यावरण में मौजूद अधिकांश अमोनिया, खाद (गोबर आदि) और मृत पौधों व जानवरों के प्राकृतिक रूप से सड़ने (breakdown) से आती है। पर्यावरण में अमोनिया बहुत लंबे समय तक नहीं टिकती है।

मानव शरीर में अमोनिया की भूमिका:

अमोनिया स्तनधारियों (mammals) के लिए अनिवार्य है और यह डीएनए (DNA), आरएनए (RNA) तथा प्रोटीन बनाने के लिए जरूरी है। यह शरीर के ऊतकों (tissues) में एसिड-बेस (अम्ल-क्षार) का संतुलन बनाए रखने में भी मदद करती है। 

सभी स्तनधारी अपने सामान्य मेटाबॉलिज्म (उपापचय) के दौरान स्वाभाविक रूप से अमोनिया का उत्पादन और उपयोग करते हैं। एक इंसान के शरीर के भीतर भी हर दिन अमोनिया बनती है। इसका अधिकांश हिस्सा शरीर के अंगों और ऊतकों द्वारा बनता है, जबकि कुछ हिस्सा हमारी आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया द्वारा तैयार किया जाता है।

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