विश्व बैंक ने भारत के लिए ‘डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग (DPF)’ को मंज़ूरी दी

विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने ‘बूस्टिंग जॉब क्रिएशन इन द प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग (DPF) ऑपरेशन’ के तहत निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत के संरचनात्मक सुधारों के समर्थन में 1.5 बिलियन डॉलर के वित्तपोषण (लोन) को मंजूरी दी है। यह डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग (DPF) ऑपरेशन उन 1.1 करोड़ (11 मिलियन) युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है जो अगले दो दशकों तक हर साल श्रम बाजार (लेबर मार्केट) में प्रवेश करेंगे।

यह DPF ऑपरेशन हाल के वर्षों में किए गए या शुरू किए गए कई संरचनात्मक सुधारों पर आधारित है, जिसमें कर सरलीकरण (tax simplification), व्यापार एकीकरण (trade integration) और जीवन को आसान बनाने (ease of living) व व्यापार करने की सुगमता (ease of doing business) को बेहतर बनाने के लिए विधायी और विनियामक सुधार शामिल हैं।

यह DPF, भारत सरकार के ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण (विज़न) पर आधारित, वित्त वर्ष 2026-31 के लिए भारत के लिए विश्व बैंक समूह के कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF) के अनुरूप है।

कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF): 

यह विश्व बैंक समूह का प्राथमिक रणनीतिक उपकरण है जो यह रूपरेखा तैयार करता है कि संगठन किसी ऋण लेने वाले देश के साथ कैसे सहयोग करेगा। यह 4 से 10 वर्षों की अवधि में देश के राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के साथ विश्व बैंक के वित्तपोषण और वैश्विक विशेषज्ञता को संरेखित (align) करता है।

डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग (DPF): यह ऋण प्राप्त करने देश को वास्तविक या अनुमानित विकास वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करने के लिए तेजी से वितरित होने वाला वित्तपोषण प्रदान करता है। DPF नीतिगत और संस्थागत कार्यों के एक कार्यक्रम के माध्यम से ऋण प्राप्तकर्ता को गरीबी कम करने और जलवायु-अनुकूल, सतत व समावेशी विकास हासिल करने में सहायता करता है।

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