राष्ट्रीय स्तर पर ‘पोत संचार एवं सहायता प्रणाली’ लागू की जाएगी
देशभर के लगभग एक लाख समुद्री मत्स्य नौकाओं पर शीघ्र ही स्वदेशी रूप से विकसित ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे। यह कदम मछुआरों की सुरक्षा, संचार और नौवहन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद उठाया गया है।
भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग (मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय) ने हाल ही में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पोत संचार एवं सहायता प्रणाली के देशव्यापी क्रियान्वयन को लगभग 364 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी है।
परियोजना के प्रमुख घटक
इस परियोजना में शामिल हैं—
- समुद्री मत्स्य नौकाओं पर ट्रांसपोंडर की स्थापना।
- भूमि आधारित संचार केंद्रों तथा संबंधित संचार अवसंरचना का विकास।
- क्षेत्रीय भाषाओं में ‘नभमित्र’ मोबाइल अनुप्रयोग का विकास।
योजना के अंतर्गत पात्र मछुआरों को ट्रांसपोंडर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।
वित्तीय व्यवस्था
- योजना का कार्यान्वयन केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 लागत साझेदारी के आधार पर किया जाएगा।
- केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।
पोत संचार एवं सहायता प्रणाली
पोत संचार एवं सहायता प्रणाली का विकास भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा किया गया है।
इसका उद्देश्य:
- समुद्री मत्स्य नौकाओं की निगरानी,
- नियंत्रण,
- तथा पर्यवेक्षण को सुदृढ़ करना है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने समुद्री मछुआरा समुदाय को वास्तविक समय पर संचार और सहायता सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘नभमित्र’ मोबाइल ऐप भी विकसित किया है।
यह पहल समुद्र में कार्यरत मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित संपर्क सुनिश्चित करने तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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