भारत-UK CETA और सामाजिक सुरक्षा समझौता 15 जुलाई से लागू होगा

 भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने 17 जून को एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) और सामाजिक सुरक्षा योगदान पर समझौता—जिसे ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) भी कहा जाता है—15 जुलाई 2026 से लागू हो जाएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत करेगा। इस व्यापार समझौते के साथ लागू होने वाला डीसीसी (DCC) समझौता, ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर देगा।

रोडमैप 2030 और वार्ता का सफर

इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में ‘भारत-ब्रिटेन संवर्धित व्यापार साझेदारी’ (India-UK Enhanced Trade Partnership) और ‘रोडमैप 2030’ के माध्यम से रखी गई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर ले जाना और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना था। 

कुल 14 दौर की लंबी वार्ताओं के बाद, 6 मई 2025 को CETA को अंतिम रूप दिया गया और 24 जुलाई 2025 को लंदन में इस पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। 30 अध्यायों वाले इस CETA समझौते का दायरा पारंपरिक टैरिफ (शुल्क) कटौती से कहीं आगे है; इसमें डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और सरकारी खरीद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

कई प्रमुख उत्पादों पर सीमा शुल्क होगा ‘शून्य’

इस समझौते के तहत ब्रिटेन ने भारत को अब तक के सबसे व्यापक प्रस्तावों में से एक दिया है। इसके तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाले भारी शुल्कों को घटाकर शून्य कर दिया जाएगा। इसमें शामिल हैं:

  • प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों (Processed food) पर 70 प्रतिशत तक का शुल्क।
  • समुद्री उत्पादों (Marine products) पर 21.5 प्रतिशत शुल्क।
  • इंजीनियरिंग सामानों और ऑटो घटकों पर 18 प्रतिशत शुल्क।
  • चमड़ा और फुटवियर उत्पादों पर 16 प्रतिशत शुल्क।
  • कपड़ा और परिधान (Textiles and clothing) पर 12 प्रतिशत शुल्क।
  • रसायन और फार्मास्युटिकल उत्पादों पर 8 प्रतिशत शुल्क।

भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत: ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’

‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) के लागू होने से अस्थायी असाइनमेंट पर ब्रिटेन जाने वाले भारतीय कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं (employers) को वहां दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान (Dual Social Security Contribution) का भुगतान करने से छूट मिलेगी। इस छूट की अवधि को भी अब 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है, जिससे ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।

स्टील निर्यात को लेकर भी बनी सहमति

भारत और ब्रिटेन के बीच 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले यूके के आगामी ‘स्टील उपायों’ (Steel Measures) को लेकर भी एक आपसी समझ बन गई है। सरकार के अनुसार, इस सहमति के बाद भारत के कुल स्टील निर्यात का 85 प्रतिशत हिस्सा इन नए उपायों (प्रतिबंधों या शुल्कों) के दायरे से बाहर रहेगा।

सरकार ने कहा कि भारत-यूके CETA को इस तरह से तैयार किया गया है जिससे समाज के एक बड़े और व्यापक वर्ग को इसका सीधा लाभ मिल सके।

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