महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने नागपुर में साइक्लोट्रॉन परियोजना को मंजूरी दी

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने नागपुर में 300 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के साथ उच्च-ऊर्जा चिकित्सा साइक्लोट्रॉन परियोजना (HEMCP) की स्थापना को मंजूरी दी। यह परियोजना नागपुर को ‘रेडियोफार्मास्युटिकल इनोवेशन हब’ के रूप में विकसित करेगी, जिससे मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों पर इस क्षेत्र की निर्भरता कम होगी। यह PET-CT और परमाणु चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण रेडियोआइसोटोप की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

नागपुर की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति इसे एक आदर्श केंद्र बनाती है। यह एम्स (AIIMS), राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (NCI) और सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) के मौजूदा नेटवर्क का लाभ उठाते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैले 500 किलोमीटर के दायरे में आने वाले मरीजों की जरूरतों को पूरा करेगा।

साइक्लोट्रॉन क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, साइक्लोट्रॉन एक प्रकार का कण त्वरक (पार्टिकल एक्सीलरेटर) है। यह प्रोटॉन या आयनों जैसे आवेशित कणों को बहुत उच्च गति तक ले जाने के लिए चुंबकीय और विद्युत क्षेत्रों का उपयोग करता है। इससे कण लक्ष्य सामग्री (टारगेट मैटेरियल्स) के साथ टकराकर परमाणु प्रतिक्रियाओं के माध्यम से रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करते हैं।

रेडियोआइसोटोप के कई उपयोग हैं, जिनमें जीवन रक्षक चिकित्सा उपचार, वैज्ञानिक अनुसंधान और यहाँ तक कि स्वच्छ ऊर्जा तकनीकें भी शामिल हैं। 

साइक्लोट्रॉन उन उपकरणों, उपचारों और खोजों को शक्ति प्रदान करते हैं जो हमारे दैनिक जीवन को बेहतर बनाते हैं। साइक्लोट्रॉन लक्षित रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी में उपयोग की जाने वाली विशेष रेडियोधर्मी (रेडियोएक्टिव) दवाओं का उत्पादन करके कैंसर के उपचार में सहायता करते हैं। साइक्लोट्रॉन को अत्यधिक बहुमूल्य माना जाता है क्योंकि वे साइट पर या उसके आसपास आइसोटोप का उत्पादन कर सकते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि मरीजों को त्वरित, सटीक निदान और समय पर उपचार प्राप्त हो सके।

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