कोर-कोलैप्स सुपरनोवा (CCSNe)
सुपरनोवा SN 2023zcu, जो NGC 2139 आकाशगंगा के किनारे स्थित है, का विस्तृत अध्ययन ब्रह्मांडीय दूरियों को मापने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। ‘कोर-कोलैप्स सुपरनोवा’ (CCSNe) तब होते हैं जब एक विशाल तारा अपना परमाणु ईंधन समाप्त कर लेता है और अपने गुरुत्वाकर्षण को संभालने में असमर्थ हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप एक विनाशकारी विस्फोट होता है।
कोर-कोलैप्स सुपरनोवा की प्रक्रिया
टाइप IIP सुपरनोवा, जो इस श्रेणी का सबसे सामान्य प्रकार है, एक विशाल ‘रेड सुपरजायंट’ तारे के जीवन के अंत में होता है। इसकी प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
- कोर का पतन: जब तारे के केंद्र में ईंधन खत्म हो जाता है, तो कोर ढहकर एक ‘प्रोटो-न्यूट्रॉन स्टार’ बन जाता है।
- शॉक वेव (आघात तरंग): गिरने वाली बाहरी परतें कोर से टकराकर वापस उछलती हैं, जिससे एक शक्तिशाली शॉक वेव उत्पन्न होती है।
- विस्फोट: जब यह शॉक वेव तारे की सतह पर पहुँचती है, तो बाहरी परतें अंतरिक्ष में बिखर जाती हैं, जिससे अत्यधिक चमक उत्पन्न होती है।
- शॉक कूलिंग: जैसे-जैसे ये परतें फैलती और ठंडी होती हैं, सुपरनोवा अपनी ऊर्जा खोने लगता है। इस चरण को ‘शॉक कूलिंग’ कहा जाता है।
- अपारदर्शिता चरण: इसके बाद कुछ महीनों तक की एक ऐसी अवधि आती है जब सुपरनोवा ‘अपारदर्शी’ (opaque) रहता है।
ब्रह्मांडीय महत्व
सुपरनोवा केवल विनाशकारी घटनाएँ ही नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्मांड के ‘रीसाइक्लिंग सेंटर’ की तरह कार्य करते हैं। ये भारी तत्वों का निर्माण करते हैं और उन्हें अंतरिक्ष में फैलाते हैं, जो बाद में नए सितारों, ग्रहों और जीवन के निर्माण का आधार बनते हैं। SN 2023zcu जैसे सुपरनोवा का अध्ययन करके खगोलशास्त्री ब्रह्मांड के विस्तार की दर और स्थानीय ब्रह्मांड की दूरी का सटीक अनुमान लगा पाते हैं।


