ताना भगत समुदाय

झारखंड के गुमला जिले में ‘भारतमाला’ परियोजना के तहत प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग के खिलाफ ताना भगत समुदाय का विरोध प्रदर्शन जारी है। उनका तर्क है कि यह परियोजना उनके पैतृक भूमि, वनों, धार्मिक स्थलों, कृषि आधारित आजीविका और विशेष संवैधानिक प्रावधानों के तहत संरक्षित ‘अनुसूचित क्षेत्र’ (Scheduled Area) के सामुदायिक स्थानों के लिए एक बड़ा खतरा है। 

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ताना भगत छोटानागपुर क्षेत्र की ओरांव जनजाति के आदिवासी हैं। यह समुदाय औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन, जमींदारों, भारी करों और अन्य शोषणकारी नीतियों के खिलाफ अपने ऐतिहासिक प्रतिरोध के लिए जाना जाता है।
  • नेतृत्व: इस आंदोलन की शुरुआत 1914 में जतरा भगत के नेतृत्व में हुई थी।
  • गांधीवादी विचारधारा: समय के साथ, यह आंदोलन गांधीवादी विचारधारा से गहराई से जुड़ गया। ताना भगतों की पहचान उनके सफेद कपड़े, सफेद टोपी और तिरंगा झंडा साथ लेकर चलने से होती है। वे अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करते हैं।

सांस्कृतिक प्रथाएं: आदिवासी कार्यकर्ताओं और ‘सरना’ (Sarna) विद्वानों के अनुसार, ताना भगतों ने अपनी जीवनशैली में कई बदलाव अपनाए, जिनमें पशु बलि और शराब के सेवन का पूर्ण त्याग शामिल है।

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