कलाई-II जलविद्युत परियोजना और सफेद पेट वाला बगुला

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) ने लोहित नदी पर प्रस्तावित 1,200 मेगावाट की कलाई-II जलविद्युत परियोजना को सैद्धांतिक (in-principle) वन मंजूरी दे दी है। यह नदी गंभीर रूप से लुप्तप्राय सफेद पेट वाले बगुले (White-Bellied Heron) के प्रमुख पर्यावासों में से एक है।

परियोजना का विवरण

  • प्रस्तावित स्थान: अरुणाचल प्रदेश का अंजाव जिला (चीन की सीमा के पास)।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDC India Limited)।
  • परियोजना लागत: ₹14,176.26 करोड़।
  • प्रारूप: यह ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (run-of-the-river) परियोजना है, जिसमें 128.5 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध और एक भूमिगत पावर हाउस का निर्माण शामिल है।
  • वन क्षेत्र: परियोजना के लिए 869 हेक्टेयर वन भूमि को मंजूरी दी गई है, जिसमें से 638 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न (submergence) हो जाएगा।

प्रमुख शर्तें और चिंताएँ

  • प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation): चूँकि अरुणाचल प्रदेश एक “पहाड़ी और वनाच्छादित राज्य है जहाँ भौगोलिक क्षेत्र का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा वनों से ढका है”, इसलिए इसके लिए प्रतिपूरक वनीकरण मध्य प्रदेश में किया जाएगा।
  • वन्यजीव संरक्षण: FAC ने निर्देश दिया है कि वन्यजीव प्रबंधन योजना में सफेद पेट वाले बगुले के पर्यावास के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाए। इस योजना को मुख्य मंजूरी में निर्धारित शर्तों के अनुपालन रिपोर्ट के साथ जमा करना होगा।

सफेद पेट वाला बगुला (White-Bellied Heron – WBH)

  • संकट की स्थिति: इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार, विश्व भर में इनकी संख्या 60 से भी कम बची है।
  • वर्गीकरण: इसे ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ (Critically Endangered) के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि इनकी आबादी अत्यंत कम है और तेजी से घट रही है।
  • महत्व: यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बगुला है और सबसे संकटापन्न  पक्षियों में से एक है। भारत में यह मुख्य रूप से असम और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है। लोहित नदी इस पक्षी के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्यावास है।
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