सीमा सुरक्षा बल (BSF) की भूमिका
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 मई को अधिकारियों को देश की सीमाओं के 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माणों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति को सख्ती से लागू करने और ऐसे सभी ढांचों को गिराने का निर्देश दिया है। शाह राजस्थान के बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के निर्देश और भूमिका
- सतर्कता: गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को अवैध तस्करी, घुसपैठ और सीमा पार की गतिविधियों के खिलाफ निरंतर सतर्कता बनाए रखकर अपनी तैयारियों को और मजबूत करना चाहिए।
- स्थापना और कार्य: BSF का गठन सितंबर 1968 में ‘सीमा सुरक्षा बल अधिनियम’ के तहत किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की पड़ोसी देशों के साथ लगती सीमाओं की सुरक्षा करना है। इसे कई कानूनों के तहत गिरफ्तारी, तलाशी और ज़ब्ती करने का अधिकार प्राप्त है।
- कानूनी अधिकार: BSF अधिनियम की धारा 139(1) केंद्र सरकार को यह शक्ति देती है कि वह सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों को अधिसूचित कर सकती है, जहाँ BSF केंद्र द्वारा निर्दिष्ट कानूनों के तहत अपराधों को रोकने के लिए अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सके।
अधिकार क्षेत्र का विस्तार (2021 का निर्णय)
अक्टूबर 2021 में जारी अधिसूचना के माध्यम से केंद्र सरकार ने BSF के अधिकार क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे:
- विस्तार: पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में BSF का अधिकार क्षेत्र सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया।
- परिवर्तन और यथास्थिति:
- गुजरात में इसे 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया।
- राजस्थान के लिए 50 किलोमीटर की सीमा को यथावत रखा गया।
- अधिकारों का दायरा: इस विस्तृत अधिकार क्षेत्र (50 किमी) में BSF केवल दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, और पासपोर्ट अधिनियम के तहत ही अपनी शक्तियों का उपयोग कर सकती है। अन्य केंद्रीय कानूनों के लिए 15 किलोमीटर की सीमा अभी भी प्रभावी है।
नोट: अन्य राज्यों जैसे मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय तथा केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में BSF का अधिकार क्षेत्र पूरे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में लागू है।


