मेकेदातु परियोजना: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने उस फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कर्नाटक की प्रस्तावित ‘मेकेदातु बैलेंसिंग रिजरवायर’ (Mekedatu Balancing Reservoir) परियोजना को चुनौती देने वाली तमिलनाडु की याचिका को “समयपूर्व” (premature) करार दिया गया था। इस बीच, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे कर्नाटक के साथ मेकेदातु बांध विवाद को सुलझाने में पहल करें।

मेकेदातु परियोजना क्या है?

  • उद्देश्य: इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कावेरी नदी पर एक ‘बैलेंसिंग रिजरवायर’ बनाना है, ताकि बेंगलुरु महानगर और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए 4.75 TMC (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
  • अतिरिक्त लाभ: पेयजल के साथ-साथ, यह परियोजना लगभग 400 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का उत्पादन भी करेगी।
  • स्थान: यह बांध कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकपुरा के पास, कावेरी नदी की एक गहरी घाटी (गॉर्ज) में बनाया जाना प्रस्तावित है।
    • महत्वपूर्ण तथ्य: यह स्थान तमिलनाडु की सीमा से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
    • नाम का अर्थ: कन्नड़ भाषा में ‘मेकेदातु’ का अर्थ होता है “बकरी की छलांग” (goat’s leap)।
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