नागोया प्रोटोकॉल’ के कार्यान्वयन पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट से प्राप्त अंतर्दृष्टि

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने ‘नागोया प्रोटोकॉल’ के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट से प्राप्त मुख्य जानकारियों को साझा किया है। यह रिपोर्ट प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 29 के आधार पर 27 फरवरी, 2026 को ‘कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी’ (CBD) के सचिवालय को सौंपी गई थी।  

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु और ‘एबीएस’ (ABS) का महत्व

‘एबीएस’ (ABS – Access and Benefit Sharing) का अर्थ है: आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग से होने वाले लाभों का निष्पक्ष एवं न्यायसंगत बंटवारा।

प्रमुख जानकारी:

  • सफलता की कहानियाँ: रिपोर्ट में 12 केस स्टडीज शामिल हैं जो बताती हैं कि कैसे एबीएस (ABS) का सही क्रियान्वयन स्थानीय समुदायों के लिए फायदेमंद रहा है।
  • अनुमोदन (Approvals): 1 नवंबर, 2017 से 31 दिसंबर, 2025 के बीच एबीएस ढांचे के तहत कुल 12,830 अनुमोदन (approvals) दिए गए।

एक उदाहरण: मध्य प्रदेश का मामला (कोकुलस हिरसुटस/Cocculus hirsutus)

रिपोर्ट में Cocculus hirsutus (एक औषधीय पौधा) के उपयोग का उदाहरण दिया गया है:

  • प्रक्रिया: 2017 में सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के वन क्षेत्रों से इस पौधे को प्राप्त किया।
  • भुगतान: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने ABS नियम, 2014 के तहत 4,50,000 रुपये का अग्रिम भुगतान निर्धारित किया।

लाभ का बंटवारा: एबीएस नियमों के अनुसार, कुल राशि का 95% (4,27,500 रुपये) वर्ष 2020 में ‘मध्य प्रदेश लघु वनोपज सहकारी संघ’ को हस्तांतरित किया गया, ताकि इसका उपयोग संरक्षण और सामुदायिक विकास कार्यों के लिए किया जा सके। शेष राशि NBA ने अपने पास रखी।

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