केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रीगाबालिन दवा को शेड्यूल H1 के अंतर्गत लाया
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 13 मई 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना G.S.R. 377(E) के माध्यम से ‘प्रीगाबालिन’ (Pregabalin) दवा को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची H1 (Schedule H1) के तहत शामिल करने की अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना 20 मई 2026 को भारत के असाधारण राजपत्र में प्रकाशित की गई है।
यह निर्णय क्यों लिया गया?
यह कदम देश के कुछ राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों के मद्देनजर उठाया गया है, जिनमें विशेष रूप से युवाओं के बीच प्रीगाबालिन के दुरुपयोग और नशे के रूप में इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। हालांकि यह दवा पुराने दर्द, न्यूरोपैथी और फाइब्रोमायल्गिया के उपचार के लिए निर्धारित की जाती है, लेकिन इसके शामक (sedative) और उत्साहवर्धक प्रभावों के कारण इसका दुरुपयोग बढ़ रहा था।
अनुसूची H1 के तहत नए नियम:
प्रीगाबालिन के अनुसूची H1 में शामिल होने से अब इसके नियम काफी सख्त हो गए हैं:
- वैध प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य: यह दवा अब केवल एक पंजीकृत चिकित्सक (Registered Medical Practitioner – RMP) द्वारा जारी किए गए वैध नुस्खे पर ही बेची जा सकेगी।
- रिकॉर्ड रखना: खुदरा विक्रेताओं (Retailers) को दवाओं की बिक्री और प्रिस्क्रिप्शन का विवरण दर्ज करने के लिए एक अलग रजिस्टर रखना अनिवार्य होगा।
- पैकेजिंग चेतावनी: निर्माताओं को दवा के पैकेजिंग पर “अनुसूची H1 दवा चेतावनी” (Schedule H1 Drug Warning) का लेबल प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा।
- सख्त कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने पर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अनुसूची H1 क्या है?
भारत सरकार ने 2014 में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के बढ़ते खतरे को रोकने और कुछ दवाओं के अंधाधुंध उपयोग को नियंत्रित करने के लिए ‘अनुसूची H1’ की शुरुआत की थी।
- इसके अंतर्गत तीसरी और चौथी पीढ़ी के एंटीबायोटिक्स, कुछ मनोरोग संबंधी (psychotropic) दवाएं और एंटी-टीबी दवाएं शामिल हैं।
- इस अनुसूची का उद्देश्य इन दवाओं की ओवर-द-काउंटर (बिना प्रिस्क्रिप्शन के) बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित करना है।



