भारत में ‘कोल्ड वॉटर फिशरीज’
भारत का ‘कोल्ड वॉटर फिशरीज’ (ठंडे पानी की मत्स्य पालन) क्षेत्र ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है। यह आजीविका पैदा करने, पोषण में सुधार, इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और पहाड़ी क्षेत्रों के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कोल्ड वॉटर फिशरीज की प्रमुख विशेषताएं:
- अनुकूल स्थितियां: यह मत्स्य पालन उच्च ऊंचाई वाले बर्फ से पोषित नदियों, धाराओं, झीलों और जलाशयों में किया जाता है।
- तापमान: 5°C से 25°C के बीच।
- ऑक्सीजन: 6 मिलीग्राम/लीटर से अधिक।
- pH स्तर: 6.5 से 8.0 के बीच।
- प्रमुख प्रजातियां: रेनबो ट्राउट, गोल्डन महाशीर और स्नो ट्राउट।
- तकनीक और बुनियादी ढांचा: आधुनिक मत्स्य पालन के लिए हैचरी, रेसवे, आरएएस (RAS), बायोफ्लॉक सिस्टम और कोल्ड चेन सुविधाओं का उपयोग किया जाता है।
- भौगोलिक विस्तार: यह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय, नागालैंड के अलावा पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के पहाड़ी जिलों में लगभग 5.33 लाख वर्ग किमी से अधिक पर्वतीय क्षेत्र में फैला हुआ है।
- जैव विविधता: भारत में कोल्ड वॉटर फिश की 278 से अधिक प्रजातियों की पहचान की गई है।
प्रमुख क्लस्टर (Clusters):
सरकार ने इस क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए चार प्रमुख कोल्ड वॉटर फिशरीज क्लस्टर अधिसूचित किए हैं:
- अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर)
- पिथौरागढ़ (उत्तराखंड)
- कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)
- करगिल (लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश)
कृषि पद्धति:
- ट्राउट फार्मिंग: आमतौर पर 1,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में की जाती है।
महाशीर कल्चर: यह अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।


