बिरसा 101: भारत की पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और सीएसआईआर-जीनोमिक्स और एकीकृत जीवविज्ञान संस्थान (CSIR-IGIB) के सहयोग से “बिरसा 101” (BIRSA 101) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला 14 मई 2026 को नई दिल्ली के CSIR-IGIB में आयोजित की गई।

“बिरसा 101” सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease – SCD) के इलाज के लिए भारत की पहली स्वदेशी क्रिस्पर-आधारित (CRISPR-based) जीन थेरेपी है। इस कार्यशाला का आयोजन देश भर में चल रहे ‘जनजातीय गौरव उत्सव 2026’ के समारोहों के तहत किया गया।

“बिरसा 101” का महत्व और उद्देश्य

  • नामकरण: भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर रखी गई यह “बिरसा 101” थेरेपी भारत के उभरते हुए जैव प्रौद्योगिकी (biotechnology) और जीनोमिक अनुसंधान प्रणाली में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
  • सिकल सेल का उन्मूलन: यह पहल भारत सरकार द्वारा सिकल सेल रोग को पूरी तरह समाप्त करने के निरंतर प्रयासों को आगे बढ़ाती है।
  • जनजातीय कल्याण: सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक (genetic) रक्त विकार है, जो देश के कई क्षेत्रों में मुख्य रूप से जनजातीय (आदिवासी) आबादी को असमान रूप से प्रभावित करता है। यह स्वदेशी तकनीक इस आबादी को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने में गेम-चेंजर साबित होगी।

तकनीकी नोट: क्रिस्पर (CRISPR) एक अत्याधुनिक जीन-एडिटिंग (gene-editing) तकनीक है, जिसकी मदद से डीएनए (DNA) के खराब हिस्से को ठीक करके सिकल सेल जैसी आनुवंशिक बीमारियों का उनके मूल कारण से इलाज किया जा सकता है।

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