बरखा सुब्बा और परवीन शेख ने जीते प्रतिष्ठित 2026 व्हिटली अवार्ड्स
भारतीय संरक्षणवादियों, बरखा सुब्बा और परवीन शेख ने प्रतिष्ठित 2026 व्हिटली अवार्ड्स जीता है। उन्हें यह सम्मान क्रमशः हिमालयन सैलामैंडर के पर्यावास के संरक्षण और चंबल नदी पर इंडियन स्किमर (Indian Skimmer) के घोंसलों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक नेतृत्व वाले प्रयासों के लिए दिया गया है।
बरखा सुब्बा: हिमालयन सैलामैंडर का संरक्षण
दार्जिलिंग स्थित ‘फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन’ (FOSEP) में वैज्ञानिक सलाहकार बरखा सुब्बा, दार्जिलिंग में हिमालयन सैलामैंडर के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पहले समन्वित जमीनी प्रयास का नेतृत्व करेंगी।
- परियोजना के मुख्य कार्य: प्रयास आवास का पुनरुद्धार, आक्रामक प्रजातियों को हटाना, घातक ‘कायट्रिड फंगल’ (chytrid fungal) बीमारी की जांच और संधारणीय भूमि उपयोग तथा पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय लोगों को जागरूक करना।
- हिमालयन सैलामैंडर के बारे में: भारत, नेपाल और भूटान की स्थानिक (Endemic) यह प्रजाति 17 सेमी तक लंबी हो सकती है और 11 साल तक जीवित रह सकती है।
- फिलोपेटी (Philopatry): सैलामैंडर प्रजनन और अंडे देने के लिए अपने जन्म स्थान पर ही लौटते हैं। इस प्रक्रिया को ‘फिलोपेटी’ कहा जाता है, जो उन्हें पर्यावास और आर्द्रभूमि (wetland) के स्वास्थ्य में बदलाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।
परवीन शेख: इंडियन स्किमर के ‘रक्षक’
परवीन शेख को चंबल नदी पर उनके सामुदायिक नेतृत्व वाले “गार्जियंस ऑफ द स्किमर” (Guardians of the Skimmer) पहल के लिए मान्यता दी गई है।
- उपलब्धियाँ: स्थानीय ‘घोंसला रक्षकों’ की भर्ती और निरंतर वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से, घोंसलों के बचने की दर 14% से बढ़कर 27% हो गई है। इनकी स्थानीय आबादी 2017 के 400 से बढ़कर पिछले साल लगभग 1,000 हो गई है।
- इंडियन स्किमर के बारे में: अपनी चमकीली नारंगी चोंच के लिए मशहूर यह पक्षी मछली पकड़ने के लिए नदी की सतह के बिल्कुल करीब उड़ता (skimming) है। दुनिया की लगभग 3,000 की कुल आबादी का 90% से अधिक हिस्सा भारत में रहता है।
- चुनौती: ये पक्षी नदी के बीच मौसमी रूप से उभरने वाले रेत के टीलों (sandbars) पर घोंसले बनाते हैं। नदी के बहाव के पैटर्न में छोटा सा बदलाव भी उनके प्रजनन को पूरी तरह विफल कर सकता है।
व्हिटली अवार्ड (Whitley Award) क्या है?
- इसे अक्सर “ग्रीन ऑस्कर” कहा जाता है।
- यह ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के जमीनी स्तर के संरक्षण नेताओं को सम्मानित करने वाला एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है।
यूके स्थित ‘व्हिटली फंड फॉर नेचर’ द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस पुरस्कार के तहत जैव विविधता की रक्षा करने वाली स्थानीय परियोजनाओं के लिए £50,000 (लगभग 52 लाख रुपये) की फंडिंग और वैश्विक पहचान दी जाती है।


