NSO के 80वें चक्र के ‘घरेलू उपभोग: स्वास्थ्य’ सर्वेक्षण

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 80वें चक्र के ‘घरेलू उपभोग: स्वास्थ्य’ सर्वेक्षण  के निष्कर्ष लक्षित सरकारी हस्तक्षेपों, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बीमा कवरेज में वृद्धि के कारण देश भर में स्वास्थ्य देखभाल की पहुँच में महत्वपूर्ण सुधार को रेखांकित करते हैं। 

प्रमुख सांख्यिकी और निष्कर्ष

  • कम आउट ऑफ़ पॉकेट एक्सपेंडिचर (OOPE): वर्ष 2025 में प्रति अस्पताल भर्ती मामले में ‘औसत व्यक्तिगत चिकित्सा व्यय’ (Median OOPE) ₹11,285 दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि देश में आधे से अधिक मामलों में अस्पताल में भर्ती होने पर तुलनात्मक रूप से कम खर्च होता है।
  • सार्वजनिक सुविधाओं में वहनीयता: सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में होने वाले आधे से अधिक भर्ती मामलों में केवल ₹1,100 का खर्च आता है।
  • बीमारी रिपोर्टिंग में वृद्धि (PPRA): बीमारियों की रिपोर्ट करने वाली जनसंख्या का अनुपात (PPRA) 75वें और 80वें चक्र के बीच लगभग दोगुना हो गया है:
    • ग्रामीण क्षेत्र: 6.8% से बढ़कर 12.2%
    • शहरी क्षेत्र: 9.1% से बढ़कर 14.9%
  • यह वृद्धि बेहतर जागरूकता और सक्रिय स्वास्थ्य-जांच व्यवहार (proactive health-seeking behaviour) की ओर एक निर्णायक बदलाव का संकेत देती है। 

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और बीमा का विस्तार

  • सार्वजनिक सुविधाओं का बढ़ता उपयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में बाह्य रोगी (Outpatient) देखभाल के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग 33% से बढ़कर 35% हो गया है। लंबी अवधि के रुझान को देखें तो 2014 में जहाँ 28% ग्रामीण आबादी सार्वजनिक सुविधाओं का रुख करती थी, वह 2025 में बढ़कर 35% हो गई है।
  • बीमा कवरेज में भारी उछाल: सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं/बीमा के तहत कवर की गई आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:
    • ग्रामीण क्षेत्र: 12.9% से बढ़कर 45.5%
    • शहरी क्षेत्र: 8.9% से बढ़कर 31.8%। 

प्रमुख सरकारी पहल और प्रभाव

  • मुफ्त दवाएं और जांच: 2015 में शुरू की गई ‘नि:शुल्क दवा सेवा पहल’ (FDSI) और ‘नि:शुल्क निदान पहल’ (FDI) ने देश के दूरदराज के क्षेत्रों में भी मुफ्त दवाओं और जांच सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की है।

AMRIT पहल: ‘अमृत’ (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) पहल के तहत 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 220 से अधिक फार्मेसी कार्यरत हैं। ये बाजार दरों पर 50% तक की छूट के साथ 6,500 से अधिक दवाएं प्रदान करते हैं।

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