लेह में भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क की आधारशिला रखी गई
विश्व विरासत दिवस (World Heritage Day) के अवसर पर, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह में सिंधु नदी के तट पर भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क (Petroglyph Conservation Park) की आधारशिला रखी। यह पार्क लद्दाख की सदियों पुरानी चट्टानों पर की गई नक्काशी (पेट्रोग्लिफ्स) के लिए एक समर्पित संरक्षण स्थान के रूप में कार्य करेगा।
पेट्रोग्लिफ पार्क का उद्देश्य
लद्दाख में पेट्रोग्लिफ्स वर्तमान में अनियमित पर्यटन, तेजी से बुनियादी ढांचे के विकास और जागरूकता की कमी के कारण खतरे में हैं। यह पार्क:
- लद्दाख के संवेदनशील और अलग-थलग स्थानों से एकत्र किए गए पेट्रोग्लिफ्स को एक सुरक्षित स्थान प्रदान करेगा।
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए इनके संरक्षण को सुनिश्चित करेगा।
- एक शिक्षाप्रद वातावरण में आगंतुकों के लिए इन्हें सुलभ बनाएगा।
पेट्रोग्लिफ्स (Petroglyphs) क्या हैं?
पेट्रोग्लिफ्स प्रागैतिहासिक चित्र, प्रतीक या नक्काशी हैं जो सीधे चट्टान की सतहों पर उकेरे जाते हैं।
- निर्माण प्रक्रिया: ये पत्थर की छेनी और हथौड़े (hammerstone) का उपयोग करके चट्टान की सतह पर सीधे चोट करके बनाए जाते हैं। जब चट्टान की सतह पर जमा ‘डेजर्ट वार्निश’ (या पेटिना) को हटाया जाता है, तो नीचे की हल्की चट्टान दिखाई देने लगती है, जिससे पेट्रोग्लिफ का निर्माण होता है।
- चित्र बनाम नक्काशी: चट्टान पर की गई नक्काशी को पेट्रोग्लिफ कहा जाता है, जबकि चट्टान पर की गई पेंटिंग को पिक्टोग्राफ (Pictographs) कहा जाता है।
भारत में प्रमुख पेट्रोग्लिफ स्थल
भारत में पेट्रोग्लिफ्स लगभग 10,000–12,000 साल पुराने हैं, जिन्हें अक्सर मध्यपाषाण काल (Mesolithic) के शिकारी-संग्रहकर्ताओं द्वारा बनाया गया माना जाता है।
| क्षेत्र | स्थान |
| लद्दाख | लेह और सिंधु नदी घाटी |
| महाराष्ट्र | कोंकण क्षेत्र |
| मध्य प्रदेश | भीमबेटका रॉक शेल्टर |
| गोवा | उसगालीमल (Usgalimal) |
| त्रिपुरा | उनाकोटी (Unakoti) |


