स्वतंत्रता के बाद भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खदान
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में जौनागिरी (Jonnagiri) परियोजना के साथ, स्वतंत्रता के बाद भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खदान मई की शुरुआत में परिचालन शुरू करने के लिए तैयार है। जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित यह परियोजना घरेलू उत्पादन को मजबूत करने और सोने के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।
परियोजना का मुख्य विवरण
- स्थान: यह परियोजना कुरनूल जिले के जौनागिरी, एरागुडी और पगिडीराय गांवों में लगभग 598 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
- निवेश: इस परियोजना में ₹400 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है।
- महत्व: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा इस खदान को राष्ट्र को समर्पित किए जाने की उम्मीद है।
भारत में सोने के उत्पादन की वर्तमान स्थिति
भारत वर्तमान में अपनी सोने की मांग को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है:
- आयात: भारत हर साल 800 टन से अधिक सोने का आयात करता है।
- घरेलू उत्पादन: वर्तमान में घरेलू उत्पादन बहुत सीमित है। कर्नाटक की हुट्टी गोल्ड माइंस (Hutti Gold Mines) सालाना केवल लगभग 1.5 टन उत्पादन करती है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: वर्ष 2000 में कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) के बंद होने के बाद बड़े पैमाने पर खनन में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था।
वैश्विक परिदृश्य
| देश | वैश्विक स्थिति | विवरण |
| चीन | सबसे बड़ा उत्पादक | वैश्विक खान उत्पादन का लगभग 10-11% हिस्सा, सालाना 360–380 टन से अधिक उत्पादन। |
| स्विट्जरलैंड | सबसे बड़ा निर्यातक और आयातक | सोने के वैश्विक व्यापार और रिफाइनिंग का प्रमुख केंद्र। |
भविष्य की राहसार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे NMDC लिमिटेड अब तक विदेशी सोने की संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित करती रही हैं। जौनागिरी जैसी निजी क्षेत्र की पहल भारत के भीतर ही खनन बुनियादी ढांचे को विकसित करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद कर सकती है। यह न केवल रोजगार पैदा करेगा बल्कि भारत की खनिज सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।


