‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS)
चेन्नई में 23 मार्च 2026 को आयोजित अपनी 77वीं बैठक में, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के कार्यान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी है।
इन उपायों का मुख्य केंद्र ‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग’ (ABS) फंड के उपयोग की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और नामित रिपॉजिटरी के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन करना है।
ABS फंड का वितरण और उपयोग
अधिनियम की धारा 27 के अनुसार, NBA द्वारा प्राप्त ABS राशि को उन लाभार्थियों तक पहुँचाया जाना चाहिए जिनकी पहचान की गई है। जहाँ लाभार्थियों की पहचान नहीं हो पाती, वहाँ इस राशि का उपयोग उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किया जाता है जहाँ से वे जैविक संसाधन प्राप्त हुए हैं।
अनुमोदित वितरण ढांचा
| स्थिति | संस्थान/रिपॉजिटरी का हिस्सा | स्थानीय समुदाय/लाभार्थी (SBB/UTBC के माध्यम से) |
| स्रोत की पहचान होने पर | 25% – 40% | 60% – 75% |
| पर्याप्त जानकारी न होने पर | 30% | 70% (NBA/SBB/UTBC को संरक्षण कार्यों हेतु) |
ABS का वैश्विक संदर्भ
- नागोया प्रोटोकॉल और CBD: ABS ढांचा ‘जैव विविधता कन्वेंशन’ (CBD) और ‘नागोया प्रोटोकॉल’ के तहत यह सुनिश्चित करता है कि आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभों को प्रदाता देशों और स्थानीय समुदायों के साथ निष्पक्ष रूप से साझा किया जाए।
- कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क: ABS इस वैश्विक ढांचे के लक्ष्य 13 (Target 13) का मुख्य हिस्सा है, जो लाभों के न्यायसंगत और कुशल बंटवारे के लिए कानूनी उपायों पर जोर देता है।
मुख्य उद्देश्य:
- पारदर्शिता: फंड वितरण के लिए स्पष्ट प्रतिशत निर्धारित करना।
- संरक्षण को प्रोत्साहन: संस्थानों और स्थानीय समुदायों को उनके संरक्षण प्रयासों के लिए वित्तीय सहायता देना।
- सतत उपयोग: जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना।
सहमति और शर्तें: व्यावसायिक या शोध उद्देश्यों के लिए संसाधनों के उपयोग हेतु सूचित सहमति (Informed Consent) और पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों (MAT) को अनिवार्य बनाना।


