अब्राहम अकॉर्ड क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब से अब्राहम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह साम्राज्य क्षेत्र के लिए “बहुत मददगार” होगा और दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब को ईरान से “बचाया” है।
अब्राहम समझौता क्या है? (What are the Abraham Accords?)
- शुरुआत: इन समझौतों पर पहली बार 2020 में इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। बाद में मोरक्को भी इसमें शामिल हो गया।
- राजनयिक बदलाव: यह समझौता इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को सुलझाए बिना इजराइल के साथ संबंधों को सामान्य (Normalising ties) बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव था।
सऊदी अरब की स्थिति
सऊदी अरब को इस समझौते में सबसे महत्वपूर्ण संभावित भागीदार माना जाता रहा है, लेकिन रियाद का रुख स्पष्ट है:
- फिलिस्तीन का मुद्दा: सऊदी अरब ने लगातार सामान्यीकरण की किसी भी पहल को फिलिस्तीनी राष्ट्र (Palestinian statehood) की प्रगति से जोड़ा है।
- राजनीतिक संवेदनशीलता: इस्लाम के पवित्रतम स्थलों के संरक्षक और अरब जगत में अपने नेतृत्व के कारण सऊदी अरब की स्थिति राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है।
बदलती क्षेत्रीय गतिशीलता: 2023 के बाद से क्षेत्र की परिस्थितियों में बदलाव आया है:
- सऊदी-ईरान समझौता: 2023 में चीन की मध्यस्थता (China-brokered deal) से सऊदी अरब और ईरान ने अपने सात साल पुराने गतिरोध को समाप्त करते हुए राजनयिक संबंध बहाल किए।
प्रभाव: इस समझौते ने क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीति के नए समीकरण तैयार किए हैं।


