RBI ने बैंकिंग लिक्विडिटी को सहारा देने के लिए ट्रेजरी बिलों की बिक्री रद्द की
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 25 मार्च, 2026 को नीलामी में पेश किए गए ट्रेजरी बिलों के लिए मिली सभी बोलियों को अस्वीकार कर दिया। आरबीआई ने बोलियों को इसलिए खारिज किया क्योंकि निवेशक पिछले नीलामियों की तुलना में 0.05-0.10% अधिक प्रतिफल की मांग कर रहे थे। बैंकिंग प्रणाली में नकदी (Liquidity) कम होने के कारण निवेशक अधिक प्रीमियम चाह रहे थे, जिसे स्वीकार करना आरबीआई ने उचित नहीं समझा।
यह पिछले 13 महीनों में दूसरी बार है जब आरबीआई ने ऐसी कार्रवाई की है। इससे पहले 21 फरवरी, 2025 को 91-दिवसीय और 182-दिवसीय बिलों के लिए बोलियां अस्वीकार की गई थीं।
ट्रेजरी बिल (T-bills) क्या हैं?
ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अल्पकालिक ऋण लिखत (Short-term debt instruments) हैं। इनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य नीचे दिए गए हैं:
- प्रकार (Tenors): ये वर्तमान में तीन अवधियों के लिए जारी किए जाते हैं: 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन।
- प्रकृति: ये जीरो कूपन (Zero Coupon) प्रतिभूतियाँ हैं, यानी इन पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता।
- लाभ का गणित: इन्हें ‘डिस्काउंट’ पर जारी किया जाता है और ‘फेस वैल्यू’ (अंकित मूल्य) पर भुनाया जाता है। निवेशक का रिटर्न = अंकित मूल्य (₹100) – निर्गम मूल्य (Issue Price)
- जारीकर्ता: इन्हें आरबीआई द्वारा सरकार की ओर से नीलामी के माध्यम से जारी किया जाता है।
नीलामी की प्रक्रिया और भागीदारी
- प्लेटफॉर्म: नीलामी आरबीआई के कोर बैंकिंग समाधान (CBS) प्लेटफॉर्म, जिसे E-Kuber कहा जाता है, पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से आयोजित की जाती है।
- प्रतिभागी: इसमें मुख्य रूप से बैंक, प्राथमिक डीलर (Primary Dealers), खुदरा निवेशक और संस्थागत निवेशक भाग लेते हैं।
- गारंटी: ये एक तरह के प्रॉमिसरी नोट (Promissory Notes) की तरह काम करते हैं, जो भविष्य में पुनर्भुगतान की गारंटी देते हैं।


