मंत्रिमंडल ने भारत के ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ 2031-2035 को मंज़ूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च को वर्ष 2031 से 2035 की अवधि के लिए भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contribution: NDC) को मंजूरी दे दी है। 2015 में प्रस्तुत भारत के मूल जलवायु संकल्पों ने एक मजबूत नींव रखी थी, जिसमें 2030 तक जीडीपी (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता में 33-35% की कमी और स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म संसाधनों की 40% हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया था। ये दोनों लक्ष्य निर्धारित समयसीमा से क्रमशः 11 साल और 9 साल पहले ही पूरे कर लिए गए, जो जलवायु शासन के प्रति भारत के विश्वसनीय और कार्रवाई-उन्मुख दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं।
उत्सर्जन तीव्रता (Emissions Intensity): 2005 से 2020 के दौरान भारत की उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी आई है, और अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर 2035 तक 47% कर दिया गया है। उत्सर्जन तीव्रता, आर्थिक उत्पादन (जैसे GDP) या भौतिक गतिविधि की प्रति इकाई उत्सर्जित होने वाली ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) की मात्रा को मापती है।
स्थापित विद्युत क्षमता: स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी बढ़ाने के अद्यतन एनडीसी (NDC) लक्ष्य की दिशा में, देश ने फरवरी 2026 तक 52.57% गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल कर ली है। इस प्रकार समयसीमा से पांच साल पहले ही लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और अब 2035 तक स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी के लक्ष्य को बढ़ाकर 60% कर दिया गया है।
कार्बन सिंक: इसके अलावा, वन और वृक्ष आच्छादन के माध्यम से अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के एनडीसी लक्ष्य पर, भारत ने 2021 तक पहले ही 2.29 बिलियन टन CO2 के बराबर कार्बन सिंक बना लिया है। अब भारत ने 2005 के स्तर से 2035 तक वन और वृक्ष आच्छादन के माध्यम से कार्बन सिंक बनाने की महत्वाकांक्षा को बढ़ाकर 3.5-4.0 बिलियन टन CO2 के बराबर कर दिया है।
2031-2035 के लिए भारत के एनडीसी को आकार देने में, सरकार ने पहले ग्लोबल स्टॉकटेक (GST) के परिणामों, समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत और निष्पक्षता पर विचार किया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय वास्तविकताओं, विकासात्मक प्राथमिकताओं, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु कार्रवाई में अधिक महत्वाकांक्षा की आवश्यकता के बीच तालमेल बिठाना है, जो पेरिस समझौते के उद्देश्य और दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप है।
भारत के जलवायु लक्ष्यों का तुलनात्मक विश्लेषण
| क्षेत्र (Sector) | मूल लक्ष्य (2015 NDC) | वर्तमान उपलब्धि (फ़रवरी 2026 तक) | नया लक्ष्य (2035 तक) |
| उत्सर्जन तीव्रता (Emissions Intensity) | GDP का 33-35% कम करना (2030 तक) | 36% की कमी (2005-2020 के दौरान ही प्राप्त) | 47% की कमी |
| गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता (Non-fossil Fuel Capacity) | कुल स्थापित क्षमता का 40% | 52.57% (समय से 5 वर्ष पूर्व प्राप्त) | 60% हिस्सेदारी |
| कार्बन सिंक (Carbon Sink) | 2.5–3 बिलियन टन $CO_2$ के बराबर | 2.29 बिलियन टन $CO_2$ (2021 तक) | 3.5–4.0 बिलियन टन $CO_2$ |


