NBA ने इनवेसिव विदेशी प्रजातियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित किया

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुपालन में, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने देश भर में आक्रामक विदेशी प्रजातियों (Invasive Alien Species – IAS) द्वारा उत्पन्न बढ़ते पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक जोखिमों से निपटने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

यह निर्णय NGT द्वारा एक स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही के बाद लिया गया है, जिसमें देशी जैव विविधता, प्रमुख पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि, खाद्य सुरक्षा, और मानव एवं वन्यजीव स्वास्थ्य के लिए आक्रामक प्रजातियों के गंभीर खतरों को रेखांकित किया गया था।

मुख्य बिंदु:

  • संवैधानिक आधार: NBA ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस बहु-विषयक समिति का गठन किया है।
  • समिति का अधिदेश (Mandate):
    • राज्यों से प्राप्त इनपुट के आधार पर आक्रामक विदेशी प्रजातियों की एक समेकित राष्ट्रीय सूची तैयार करना।
    • उच्च जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान करना और उन्हें प्राथमिकता देना।
    • इनके रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन के लिए विज्ञान-आधारित प्रबंधन रणनीतियों और पारिस्थितिक बहाली के उपायों की सिफारिश करना।

भारत में प्रमुख आक्रामक पादप प्रजातियाँ:

रिपोर्टों के अनुसार, भारत के लगभग दो-तिहाई प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में अब कम से कम 11 प्रमुख आक्रामक पौधों की प्रजातियाँ मौजूद हैं। अध्ययन में विशेष रूप से निम्नलिखित प्रजातियों का उल्लेख किया गया है जो भारतीय वनस्पतियों को विस्थापित कर रही हैं:

  1. लैंटाना कमारा (Lantana camara): जंगलों में तेजी से फैलने वाली झाड़ी।
  2. क्रोमोलेना ओडोराटा (Chromolaena odorata): जिसे ‘कम्युनिस्ट वीड’ भी कहा जाता है।
  3. सेना स्पेक्टाबिलिस (Senna spectabilis): मुख्य रूप से दक्षिण भारत के वन्यजीव अभयारण्यों के लिए खतरा।
  4. प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (Prosopis juliflora): ‘विलायती कीकर’, जो भूजल स्तर को कम करती है।

Source: PIB

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