सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को गोद लेने वाली माताओं के लिए मातृत्व अवकाश पर 3 महीने की सीमा को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व हितलाभ अधिनियम 1961 (Maternity Benefit Act, 1961) के उस प्रावधान को रद्द कर दिया है जो केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली माताओं को ही सवेतन मातृत्व अवकाश (Paid maternity leave) का पात्र मानता था।

  • समानता का सिद्धांत: कोर्ट ने कहा कि मातृत्व ‘कानून के तहत’ बच्चे की उम्र पर निर्भर नहीं हो सकता। 3 महीने की समय-सीमा एक “कृत्रिम” (artificial) अंतर पैदा करती थी।
  • समान जिम्मेदारी: कोर्ट का मानना है कि चाहे बच्चा 3 महीने का हो या उससे बड़ा, एक दत्तक माँ (adoptive mother) की भूमिका, जिम्मेदारियाँ और देखभाल के कर्तव्य समान होते हैं।
  • नया नियम: अब कोई भी महिला जो बच्चा गोद लेती है, वह बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह (3 महीने) के मातृत्व लाभ की हकदार होगी, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो।

सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code of Social Security), 2020 (जिसमे मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल कर लिए गए हैं) के तहत मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

पात्रता मानदंड (Eligibility): महिला ने अपेक्षित डिलीवरी या बच्चे को गोद लेने की तारीख से पिछले 12 महीनों में कम से कम 80 दिनों तक उस संस्थान में काम किया हो। लाभ की राशि महिला की औसत दैनिक मजदूरी के बराबर होती है।

सवेतन अवकाश की अवधि

श्रेणीसवेतन अवकाश की अवधिविवरण
जैविक माता (Biological Mother)26 सप्ताहइसमें से अधिकतम 8 सप्ताह प्रसव की अपेक्षित तारीख से पहले लिए जा सकते हैं।
दत्तक माता (Adoptive Mother)12 सप्ताहबच्चे को सौंपे जाने की तारीख से (अब उम्र की सीमा हटा दी गई है)।
सरोगेसी माता (Commissioning Mother)12 सप्ताहबच्चा सौंपे जाने की तारीख से।

Source: Indian Express and PIB

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