साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायली हमला

18 मार्च को, इज़राइल ने ईरान के प्रमुख अपतटीय (offshore) प्राकृतिक गैस क्षेत्र ‘साउथ पार्स’ (South Pars) पर हमला किया। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान की ऊर्जा उत्पादन सुविधाओं पर यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है। साउथ पार्स पर यह हमला दो कारणों से महत्वपूर्ण है: पहला, यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र है, और दूसरा, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरानी ‘डाउनस्ट्रीम’ सुविधाओं (रिफाइनरी और प्रसंस्करण केंद्रों) पर इज़राइल और अमेरिका का यह केवल दूसरा हमला है। इस क्षेत्र के कतरी हिस्से को ‘नॉर्थ फील्ड’ के नाम से जाना जाता है।

पूरे साउथ पार्स जलाशय में अनुमानित 1,800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्रयोग करने योग्य गैस है—जो 13 वर्षों तक पूरी दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में स्थित यह क्षेत्र 2002 से उत्पादन में है और ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा यहीं से आता है। ईरान की तेल और गैस उत्पादन सुविधाएं मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिमी प्रांतों में केंद्रित हैं: खुज़ेस्तान (Khuzestan) तेल के लिए और बुशहर (Bushehr) साउथ पार्स से मिलने वाली गैस और कंडेनसेट के लिए जाना जाता है।


मुख्य तथ्य:

  • हमले की तारीख: 18 मार्च, 2026
  • युद्ध की शुरुआत: 28 फरवरी, 2026
  • साउथ पार्स की क्षमता: दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र; 1,800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस का भंडार।
  • आर्थिक प्रभाव: यह क्षेत्र ईरान के गैस उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा कवर करता है।
  • रणनीतिक स्थान: गैस के लिए बुशहर प्रांत और तेल के लिए खुज़ेस्तान प्रांत ईरान की ऊर्जा रीढ़ हैं।
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