भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 27 फरवरी 2026 को जैव विविधता कन्वेंशन (CBD) के सचिवालय को नगोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1) सौंपी है। यह रिपोर्ट ‘निगरानी और रिपोर्टिंग’ पर प्रोटोकॉल के अनुच्छेद 29 के अनुसार प्रस्तुत की गई है।

यह रिपोर्ट नगोया प्रोटोकॉल को लागू करने में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालती है और भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) के लक्ष्य 13 (Target 13) को पूरा करने में योगदान देती है। इससे पहले भारत ने नवंबर 2017 में अपनी अंतरिम राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंपी थी।


भारत का एबीएस (ABS) ढांचा

भारत का पहुंच और लाभ साझाकरण (Access and Benefit Sharing – ABS) ढांचा ‘जैवविविधता अधिनियम, 2002’ के तहत संचालित होता है, जिसे ‘जैव विविधता नियम, 2024’ और ‘एबीएस विनियम, 2025’ का समर्थन प्राप्त है। यह तीन-स्तरीय संस्थागत संरचना के माध्यम से कार्य करता है:

  1. राष्ट्रीय स्तर: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)
  2. राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर: राज्य जैव विविधता बोर्ड / केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें
  3. स्थानीय स्तर: जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs)

रिपोर्टिंग अवधि (2017-2025) की प्रमुख उपलब्धियां

  • अनुमोदन (Approvals): भारत ने कुल 12,830 ABS अनुमोदन जारी किए। इसमें जैव विविधता अधिनियम की धारा 3(2) के तहत संस्थाओं के लिए NBA द्वारा दिए गए 5,913 अनुमोदन शामिल हैं।
  • वित्तीय लाभ: ABS ढांचे के कार्यान्वयन से महत्वपूर्ण लाभ हुए हैं। इस अवधि के दौरान, NBA अनुमोदनों के माध्यम से ₹216.31 करोड़ (28.04 मिलियन अमरीकी डालर) जुटाए गए।
  • वितरण: जुटाए गए धन में से ₹139.69 करोड़ (16.83 मिलियन अमरीकी डालर) वास्तविक लाभार्थियों (Benefit Claimers) को वितरित किए जा चुके हैं।

नगोया प्रोटोकॉल के बारे में

नगोया प्रोटोकॉल, जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) का एक पूरक समझौता है। इसका पूरा नाम ‘आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनके उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण (ABS) पर नगोया प्रोटोकॉल’ है।

  • उद्देश्य: यह CBD के तीन उद्देश्यों में से एक—आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों के उचित और न्यायसंगत साझाकरण—के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक पारदर्शी कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
  • स्थापना: इसे 29 अक्टूबर 2010 को नगोया, जापान में अपनाया गया था और यह 12 अक्टूबर 2014 को लागू हुआ।
  • व्याप्ति (Scope): यह उन आनुवंशिक संसाधनों और उनके उपयोग से होने वाले लाभों पर लागू होता है जो CBD के अंतर्गत आते हैं। इसके अलावा, यह आनुवंशिक संसाधनों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान (Traditional Knowledge) को भी कवर करता है।
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