एटॉमिक घड़ी की खराबी से ISRO का NavIC सिस्टम खतरे में

ISRO ने एक बयान में बताया है कि उसके भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS)-1F सैटेलाइट में लगी आखिरी एटॉमिक घड़ी भी खराब हो गई है। इससे भारत का अपना ‘GPS’ सिस्टम यानी ‘NavIC’ और भी कमज़ोर हो गया है। सैटेलाइट्स के लिए जगह, नेविगेशन और समय से जुड़ी सेवाएँ देने के लिए एटॉमिक घड़ियाँ बहुत ज़रूरी होती हैं।

परमाणु घड़ी (Atomic Clock) का महत्व

  • सटीकता: ये घड़ियाँ अरबों वर्षों में भी एक सेकंड से कम की त्रुटि करती हैं। नेविगेशन के लिए समय का सटीक मापन अनिवार्य है क्योंकि स्थिति (Location) का निर्धारण इस आधार पर होता है कि सिग्नल उपग्रह से प्राप्तकर्ता तक पहुँचने में कितना समय लेता है।
  • क्वार्ट्ज़ बनाम परमाणु: सामान्य क्वार्ट्ज़ घड़ियाँ अंतरिक्ष नेविगेशन के लिए स्थिर नहीं होतीं। एक घंटे में ही वे एक नैनोसेकंड (एक सेकंड का अरबवां हिस्सा) पीछे हो सकती हैं, जिससे स्थिति निर्धारण में कई मीटर की गलती हो सकती है।

परमाणु घड़ी कैसे काम करती है?

  • यह डिवाइस सीज़ियम (Cesium) या रूबिडियम (Rubidium) परमाणुओं के ट्रांजीशन की सुसंगत प्रतिध्वनि आवृत्ति (Resonant Frequency) की निगरानी करके समय मापती है। यह इतनी स्थिर होती है कि अंतरिक्ष यात्रियों को एक मीटर के भीतर की सटीक स्थिति बता सकती है।

IRNSS-1F और वर्तमान स्थिति

  • मिशन का अंत: मार्च 2016 में लॉन्च किए गए IRNSS-1F ने 10 मार्च 2026 को अपना 10 साल का डिज़ाइन जीवन पूरा कर लिया है। इसकी आखिरी परमाणु घड़ी के विफल होने से यह अब अपनी कोर सर्विस देने में सक्षम नहीं है।
  • उपग्रहों की कमी: सिद्धांत रूप में, NavIC के काम करने के लिए कम से कम 4 उपग्रहों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में, 11 में से केवल 3 उपग्रह ही अपने मुख्य उद्देश्य को पूरी तरह से पूरा कर रहे हैं, जो भारतीय ‘GPS’ प्रणाली को कमजोर करता है।

नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NavIC)

2013 से अब तक नौ IRNSS सैटेलाइट लॉन्च किए जा चुके हैं। इनमें से आठ अपनी तय कक्षा में पहुँच गए। सैटेलाइट के इस समूह (IRNSS-1I) का आखिरी सैटेलाइट 2018 में लॉन्च किया गया था। जहाँ अमेरिकी, चीनी और यूरोपीय सिस्टम ग्लोबल पोज़िशनिंग सेवाएँ देते हैं, वहीं NavIC केवल भारत के अंदर और उसकी सीमा से1,500 km के दायरे में ही ये सेवाएँ देता है।

NavIC दो सेवाएँ प्रदान करता है: नागरिक उपयोगकर्ताओं के लिए स्टैंडर्ड पोजीशन सर्विस (SPS) और रणनीतिक उपयोगकर्ताओं के लिए रिस्ट्रिक्टेड सर्विस (RS)।

NavIC को मूल रूप से 7 उपग्रहों के समूह के रूप में डिज़ाइन किया गया था ताकि भारतीय भूभाग पर 10 मीटर तक की सटीक लोकेशन मिल सके। हालांकि, उपग्रहों की परमाणु घड़ियों में बार-बार आने वाली खराबी ने इस लक्ष्य को कठिन बना दिया है।

वैश्विक नेविगेशन प्रणालियों से तुलना

दुनिया में वर्तमान में चार मुख्य वैश्विक प्रणालियाँ हैं, जबकि NavIC एक क्षेत्रीय प्रणाली है:

प्रणाली का नामदेश/क्षेत्रदायरा (Range)
GPSअमेरिकावैश्विक (Global)
GLONASSरूसवैश्विक (Global)
Galileoयूरोपीय संघवैश्विक (Global)
BeiDouचीनवैश्विक (Global)
NavICभारतभारत + 1500 किमी
QZSSजापानक्षेत्रीय (GPS को बेहतर बनाने के लिए)
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