कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट (CGP) नियमों में संशोधन
संधारणीय ईंधन की दिशा में ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांज़िशन) को मजबूती देने के लिए, केंद्र सरकार ने 14 मार्च, 2026 को विद्युत नियम, 2005 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन नए नियमों को विद्युत (संशोधन) नियम, 2026 के रूप में अधिसूचित किया गया है, जो मुख्य रूप से कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट (CGP) से संबंधित नियम 3 में सुधार करते हैं।
मुख्य संशोधन और उनके अर्थ:
- कैप्टिव पावर जनरेशन क्या है? इसका अर्थ है जब औद्योगिक उपभोक्ता सार्वजनिक ग्रिड पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वयं बिजली का उत्पादन करते हैं।
- स्वामित्व और उपभोग की शर्तें: नए नियमों के तहत, एक कैप्टिव पावर प्लांट (CPP) के लिए कम से कम 26% स्वामित्व कैप्टिव उपयोगकर्ताओं के पास होना चाहिए और उनके द्वारा वार्षिक बिजली उत्पादन का 51% उपभोग किया जाना अनिवार्य है।
- सत्यापन प्रक्रिया (Verification Process): कार्यान्वयन में स्पष्टता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए कैप्टिव स्थिति का सत्यापन अब पूरे वित्तीय वर्ष के लिए किया जाएगा।
- नोडल एजेंसियों की नियुक्ति: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को 1 अप्रैल से कैप्टिव स्थिति के सत्यापन के लिए एक नोडल एजेंसी नामित करने का निर्देश दिया गया है। अंतर-राज्यीय (inter-state) कैप्टिव पावर की जिम्मेदारी नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC) की होगी।
- कॉर्पोरेट ढांचे की मान्यता: स्वामित्व की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब इसमें सहायक कंपनियां (Subsidiaries), होल्डिंग कंपनियां और उसी होल्डिंग कंपनी की अन्य सहायक कंपनियां भी शामिल होंगी। यह उन आधुनिक कॉर्पोरेट ढांचों को मान्यता देता है जहाँ बिजली संपत्तियां अक्सर विशेष प्रयोजन वाहनों (SPVs) या समूह संस्थाओं के माध्यम से विकसित की जाती हैं।
- ग्रुप कैप्टिव प्रोजेक्ट्स में लचीलापन: यह संशोधन उन मामलों में अधिक लचीलापन प्रदान करता है जहाँ कई इकाइयां मिलकर ‘ग्रुप कैप्टिव पावर प्रोजेक्ट’ संचालित करती हैं।
इस संशोधन के लाभ:
- व्याख्यात्मक अस्पष्टताओं को दूर करना: पहले नियमों की व्याख्या को लेकर विवाद होते थे, जिन्हें अब स्पष्ट कर दिया गया है।
- व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business): सत्यापन प्रक्रिया और नोडल एजेंसियों के स्पष्ट होने से उद्योगों के लिए अनुपालन आसान होगा।
- ऊर्जा सुरक्षा: उद्योग अपनी बिजली जरूरतों के लिए अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।


