मयंक चक्रवर्ती: भारत के 94वें और पूर्वोत्तर क्षेत्र के पहले ग्रैंडमास्टर
16 वर्षीय मयंक चक्रवर्ती ने स्वीडन में अपना अंतिम नॉर्म हासिल कर भारत का 94वां ग्रैंडमास्टर (GM) बनने का गौरव प्राप्त किया है।
- ऐतिहासिक उपलब्धि: मयंक असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र (North East) से भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बन गए हैं।
- कहाँ हासिल किया खिताब: उन्होंने स्वीडन के ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ’ में आयोजित 8वें जीएम टूर्नामेंट में अपना अंतिम और निर्णायक ग्रैंडमास्टर नॉर्म पूरा किया।
- कम उम्र में सफलता: मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
ग्रैंडमास्टर (GM) खिताब क्या है?
यह शतरंज की दुनिया का सर्वोच्च खिताब है, जिसे अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) द्वारा प्रदान किया जाता है।
- आजीवन उपलब्धि: एक बार यह खिताब मिलने के बाद, यह हमेशा के लिए खिलाड़ी के पास रहता है। रेटिंग कम होने पर भी इसे वापस नहीं लिया जाता।
- कठिन प्रक्रिया: इसे प्राप्त करने के लिए खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के कठिन टूर्नामेंटों में ‘नॉर्म’ (Norms) हासिल करने होते हैं और एक निश्चित रेटिंग (2500 ईलो) पार करनी होती है।
- इतिहास: दुनिया के पहले 27 खिलाड़ियों को 1950 में यह खिताब दिया गया था।
भारत का ग्रैंडमास्टर सफर
भारत ने शतरंज की दुनिया में एक लंबी और गौरवशाली यात्रा तय की है:
| मील का पत्थर | खिलाड़ी का नाम | वर्ष | आयु |
| प्रथम ग्रैंडमास्टर | विश्वनाथन आनंद | 1988 | 18 वर्ष |
| 94वें ग्रैंडमास्टर | मयंक चक्रवर्ती | 2026 | 16 वर्ष |


