रेयर अर्थ पर भारत-ब्राजील समझौता ज्ञापन

भारत और ब्राजील ने 21 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति लुला डा सिल्वा की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान दुर्लभ मृदा (rare earths) और महत्वपूर्ण खनिजों पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत की मोलभाव करने की शक्ति (bargaining power) को बढ़ाएगा। यदि भारत के पास इन सामग्रियों के केवल एक या दो वास्तविक स्रोत होते, तो विक्रेताओं को पता होता कि भारत उनकी शर्तों को ठुकरा नहीं सकता, भले ही वे शर्तें कितनी ही महंगी क्यों न हों। हालांकि, अब भारत कह सकता है कि “हम ब्राजील से आपूर्ति ले सकते हैं”, जिससे विक्रेताओं के प्रोत्साहन प्रभावित होंगे।

यह समझौता ज्ञापन कंपनियों को यह संकेत भी देता है कि उनके इनपुट (कच्चे माल) निर्यात नियंत्रण या भू-राजनीतिक झटकों से बाधित नहीं होंगे, जिससे उन्हें अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इसी तरह, यदि भारत और ब्राजील अपने पर्यावरणीय और अन्य मानकों में सामंजस्य स्थापित करने में सक्षम होते हैं, तो भारत उन बाजारों में तैयार उत्पादों को अधिक आसानी से बेच सकता है जो सामग्री के स्रोत के प्रमाण की तेजी से मांग कर रहे हैं।

यू.एस. भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (U.S. Geological Survey) के अनुसार, ब्राजील के पास 21 मिलियन टन दुर्लभ-पृथ्वी-ऑक्साइड समकक्ष (rare-earth-oxide equivalent), 2.7 बिलियन टन बॉक्साइट, 270 मिलियन टन मैंगनीज और 0.4 मिलियन टन लिथियम है। ब्राजील के दृष्टिकोण से, यह समझौता ज्ञापन इस खनिज संपदा को अपने उद्योग के लिए अधिक मूल्य में बदलने का एक तरीका हो सकता है।

भारत वर्तमान में महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला में घरेलू स्तर पर क्षमता निर्माण करने और खनिजों एवं प्रसंस्करण के लिए अधिक विदेशी साझेदारी बनाकर किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2025 में ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन’ (National Critical Mineral Mission) को मंजूरी दी, जिसमें अन्वेषण, खनन, सज्जीकरण (beneficiation), प्रसंस्करण और अनुपयोगी उत्पादों से रिकवरी को शामिल किया गया है। इसे 2024-25 से 2030-31 तक चलाने का लक्ष्य है।

भारत ने जुलाई 2023 में 30 महत्वपूर्ण खनिजों की एक सूची भी प्रकाशित की थी और महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के ब्लॉकों की नीलामी के लिए केंद्र को अधिक शक्ति देने हेतु ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2023’ का उपयोग किया है। भारत ने उन इनपुट के आयात की लागत को कम करने के लिए सीमा शुल्क (customs duty) में बदलाव का भी उपयोग किया है जिनकी देश में कमी है। इसमें हाल के बजटों में कुछ महत्वपूर्ण खनिजों और स्क्रैप एवं कचरे के लिए सीमा शुल्क में कटौती शामिल है, जिन्हें इन खनिजों को रिकवर करने के लिए संसाधित किया जा सकता है।

भारत सरकार विनिर्माण के अंतिम चरणों (late-stage manufacturing) पर भी जोर दे रही है। भारत का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम करने के घोषित उद्देश्य के साथ, एक सरकारी समर्थित कार्यक्रम के तहत 2026 के अंत तक दुर्लभ-पृथ्वी स्थायी चुम्बकों (rare-earth permanent magnets) का घरेलू उत्पादन शुरू करना है।

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