राष्ट्रपति भवन में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण
भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 23 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा (बस्ट) का अनावरण किया।
राष्ट्रपति भवन में ऐतिहासिक बदलाव
- स्थान: राजाजी की यह प्रतिमा अशोक मंडप के पास ‘ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस’ पर महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने लगाई गई है।
- उद्देश्य: इसने एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह ली है। यह कदम औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को त्यागने और भारत की समृद्ध संस्कृति व विरासत को गर्व से अपनाने की कड़ी का हिस्सा है।
- राजाजी उत्सव: राष्ट्रपति ने ‘राजाजी उत्सव’ की शोभा बढ़ाई और उनके जीवन पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च, 2026 तक अमृत उद्यान में आयोजित की जाएगी।
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
| क्षेत्र | विवरण |
| स्वतंत्रता संग्राम | उन्होंने मद्रास प्रांत में नमक कानून तोड़ने के लिए तिरुचि से वेदारण्यम तक पदयात्रा का नेतृत्व किया था। |
| राजनीतिक पद | वे 1937 में मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रीमियर (प्रधानमंत्री) बने। आजादी के बाद वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और फिर भारत के गवर्नर-जनरल बने। |
| हिंदी का मुद्दा | 1937 में उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी में अनिवार्य हिंदी का समर्थन किया था, जिससे राज्य में पहले हिंदी-विरोधी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। |
| केंद्रीय मंत्री | दिसंबर 1950 में सरदार पटेल के निधन के बाद, उन्हें भारत का गृह मंत्री नियुक्त किया गया था। |
| स्वतंत्र पार्टी | 1959 में उन्होंने ‘स्वतंत्र पार्टी’ की स्थापना की और कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा। |
| सर्वोच्च सम्मान | 1954 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। वे इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान को पाने वाले पहले व्यक्ति थे। |
| शांति दूत | 1962 में उन्होंने परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाने की अपील करने के लिए अमेरिका में गांधी शांति प्रतिष्ठान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। |


