अल-फाशिर संकट
स्वतंत्र संयुक्त राष्ट्र जांच दल की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जब अर्धसैनिक समूह रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने सूडानी शहर अल-फाशिर पर कब्जा किया, तो गैर-अरब समुदायों की सामूहिक हत्याएं की गईं, जिनमें ‘नरसंहार’ (Genocide) के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
सूडान के लिए संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय तथ्य-अन्वेषण मिशन (UN Independent International Fact-Finding Mission) ने अपनी रिपोर्ट में निम्नलिखित गंभीर खुलासे किए हैं:
अल-फाशिर की घेराबंदी और कब्जा
- अंतिम गढ़: अल-फाशिर देश के पश्चिमी हिस्से में स्थित दारफुर क्षेत्र में सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) का आखिरी बचा हुआ मजबूत गढ़ था।
- अक्टूबर 2025 का घटनाक्रम: पिछले साल अक्टूबर के अंत में RSF ने इस शहर पर कब्जा कर लिया था।
- तीन दिनों का खौफ: रिपोर्ट के अनुसार, कब्जे के दौरान तीन दिनों तक चले “खौफ के मंजर” में हजारों लोगों की हत्या की गई और महिलाओं के साथ दुष्कर्म किए गए।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रतिबंध
संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस घेराबंदी और अल-फाशिर पर कब्जे में उनकी भूमिका को लेकर RSF के तीन कमांडरों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
- व्यवस्थित हत्याएं: अमेरिका ने इस समूह पर “व्यवस्थित और व्यापक” (systematic and widespread) हत्याएं करने का आरोप लगाया है।
- मानवीय संकट: 18 महीने तक चली इस घेराबंदी ने क्षेत्र में भोजन और चिकित्सा आपूर्ति को पूरी तरह बाधित कर दिया था, जिससे वहां की स्थिति बदतर हो गई थी।


