निर्यात संवर्धन मिशन के तहत सात अतिरिक्त उपायों की शुरुआत

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission) के तहत सात अतिरिक्त उपायों (interventions) की शुरुआत की। यह केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए सशक्त बनाना है।

इन हस्तक्षेपों को भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने, समावेशी निर्यात विकास को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

यह मिशन निम्नलिखित क्षेत्रों में सुधार पर केंद्रित है:

  • प्रक्रियाओं का सरलीकरण: MSMEs के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना।
  • ऋण तक पहुंच: वित्तीय सहायता और क्रेडिट की उपलब्धता को मजबूत करना।
  • गुणवत्ता मानक: अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों को बढ़ाना।
  • अनुपालन सहायता: अंतरराष्ट्रीय नियमों और रेगुलेशन के पालन में मदद करना।
  • बुनियादी ढांचा: वैश्विक स्तर पर लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग (भंडारण) बुनियादी ढांचे का विस्तार करना। 

मिशन की कार्यप्रणाली: एक समग्र दृष्टिकोण

निर्यात संवर्धन मिशन एक एकीकृत और डिजिटल रूप से मॉनिटर किए गए ढांचे के माध्यम से काम करता है, जिसे दो मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है:

  1. निर्यात प्रोत्साहन (Niryat Protsahan): इसके अंतर्गत वित्तीय सक्षमताओं (financial enablers) पर ध्यान दिया जाता है।
  2. निर्यात दिशा (Niryat Disha): इसके माध्यम से व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र (trade ecosystem) को सहायता प्रदान की जाती है। 

कार्यान्वयन और भागीदारी

इस मिशन का कार्यान्वयन वाणिज्य विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिसमें कई महत्वपूर्ण संस्थान और मंत्रालय समन्वय कर रहे हैं:

  • सरकारी निकाय: MSME मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विदेश में स्थित भारतीय मिशन।
  • वित्तीय संस्थान: एक्ज़िम बैंक (EXIM Bank), CGTMSE, NCGTC और अन्य विनियमित ऋण संस्थान।

हितधारक: निर्यात संवर्धन परिषदें (EPCs) और उद्योग जगत के प्रमुख भागीदार।

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