नागालैंड के संगतम समुदाय की शीर्ष संस्था ने पैंगोलिन के संरक्षण के लिए प्रस्ताव पारित किया
नागालैंड के संगतम समुदाय (Sangtam community) की शीर्ष संस्था ने अपने अधिकार क्षेत्र में पैंगोलिन के संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। पैंगोलिन दुनिया में सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला जंगली स्तनधारी जीव है, और यह पहल भारत-म्यांमार सीमा पर अवैध व्यापार को रोकने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस संरक्षण प्रयास और पैंगोलिन के बारे में मुख्य तथ्य नीचे दिए गए हैं:
संरक्षण की नई पहल
- संगतम समुदाय की भूमिका: संगतम समुदाय मुख्य रूप से नागालैंड के किफिरे और तुएनसांग जिलों में केंद्रित है। यह क्षेत्र म्यांमार की सीमा से सटा हुआ है, जो वन्यजीव तस्करी का एक प्रमुख मार्ग रहा है।
- परियोजना: ‘यूनाइटेड संगतम लिखुम पुमजी’ (United Sangtam Likhum Pumji) का यह संकल्प वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के ‘काउंटरिंग पैंगोलिन ट्रैफिकिंग प्रोजेक्ट’ की एक बड़ी सफलता है।
- विस्तार: 2023 में मणिपुर से शुरू हुई यह परियोजना अब नागालैंड के सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैल गई है, ताकि भारतीय पैंगोलिन और चीनी पैंगोलिन को बचाया जा सके।
पैंगोलिन: ‘कवच वाला चींटीखोर’
पैंगोलिन अपनी विशिष्ट शारीरिक संरचना और व्यवहार के लिए जाने जाते हैं:
- शारीरिक विशेषता: इन्हें इनके शरीर पर मौजूद केराटिन से बने शल्कों (Scales) के कवच से पहचाना जाता है। खतरा महसूस होने पर ये गेंद की तरह गोल हो जाते हैं।
- आहार और स्वभाव: इन्हें ‘शल्क वाले चींटीखोर’ (Scaly anteaters) भी कहा जाता है क्योंकि ये मुख्य रूप से चींटियाँ और दीमक खाते हैं। ये एकांतप्रिय और रात्रिचर (Nocturnal) प्राणी हैं।
- तस्करी का कारण: इनके मांस और शल्कों की एशिया और अफ्रीका में पारंपरिक दवाओं और विलासिता उद्योग (Luxury industry) में भारी मांग है।
वैश्विक और भारतीय प्रजातियां
दुनिया भर में पैंगोलिन की कुल आठ प्रजातियां पाई जाती हैं, जिन्हें IUCN द्वारा संरक्षित घोषित किया गया है:
| महाद्वीप | प्रजातियां | भारत में उपस्थिति |
| एशिया | भारतीय पैंगोलिन, चीनी पैंगोलिन, सुंडा पैंगोलिन, फिलीपीन पैंगोलिन | भारतीय और चीनी पैंगोलिन भारत में पाए जाते हैं। |
| अफ्रीका | चार अन्य प्रजातियां (जैसे जाइंट पैंगोलिन, आदि) | – |
कानूनी सुरक्षा
पैंगोलिन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों (जैसे CITES) के तहत पूर्ण संरक्षण प्राप्त है, और इनके अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। नागालैंड के स्थानीय समुदायों की यह भागीदारी इन कानूनों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने में मदद करेगी।


