अर्बन चैलेंज फंड के शुभारंभ को मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने देश भर में बाजार-आधारित और सुधार-प्रेरित शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड (Urban Challenge Fund – UCF) के शुभारंभ को मंजूरी दे दी है।
यह पहल भारत की शहरी विकास रणनीति में एक युगांतरकारी बदलाव को दर्शाती है—अनुदान-आधारित (Grant-based) वित्तपोषण से हटकर अब बाजार-संबद्ध और परिणाम-उन्मुख मॉडल को अपनाया जा रहा है।
वित्तपोषण का नया ढांचा (Funding Structure)
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका वित्तीय मॉडल है, जिसे निजी निवेश और बाजार की भागीदारी बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है:
| स्रोत | योगदान (प्रतिशत) | विवरण |
| केंद्र सरकार (CA) | 25% | परियोजना लागत का एक-चौथाई हिस्सा। |
| बाजार स्रोत | कम से कम 50% | म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)। |
| राज्य/यूटी/नगर निकाय | शेष हिस्सा | राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) का योगदान। |
इस मॉडल के माध्यम से, अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल ₹4 लाख करोड़ का निवेश जुटाने की उम्मीद है।
समयसीमा और संचालन
- अवधि: यह कोष वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगा।
- विस्तार: प्रदर्शन के आधार पर इसे वित्तीय वर्ष 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है।
मुख्य उद्देश्य और चयन प्रक्रिया
अर्बन चैलेंज फंड का लक्ष्य केवल निर्माण नहीं, बल्कि शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बनाना है:
- चुनौती मोड (Challenge Mode): परियोजनाओं का चयन एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी ‘चुनौती मोड’ के माध्यम से किया जाएगा, जिससे नगर निकायों के बीच सुधारों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- जलवायु लचीलापन (Climate Resilience): यह कोष ऐसे शहरों को बढ़ावा देगा जो समावेशी होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील और लचीले हों।
- सुधार-प्रेरित विकास: वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए नगर निकायों को अपने प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे में सुधार करना अनिवार्य होगा।


