क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD)
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज’ (KFD), जिसे आमतौर पर ‘मंकी फीवर’ के नाम से जाना जाता है, के खिलाफ एक उन्नत टीका विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पश्चिमी घाट क्षेत्र की इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए वैक्सीन का विकास अब अपने महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है।
वैक्सीन विकास की वर्तमान स्थिति
ICMR के अनुसार, वैक्सीन का विकास सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया में अब तक की प्रगति इस प्रकार है:
- पशु परीक्षण (Animal Studies): जानवरों पर ‘चैलेंज’ और टॉक्सिसिटी (विषाक्तता) अध्ययन पूरे कर लिए गए हैं।
- उत्पादन: GLP-ग्रेड (गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस) वैक्सीन सामग्री का निर्माण कर लिया गया है।
- मानव परीक्षण: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से मंजूरी मिलने के बाद, फेज-I (Phase I) मानव नैदानिक परीक्षण शुरू कर दिया गया है।
क्या है क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD)?
यह भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र की एक उपेक्षित ‘टिक-जनित’ (tick-borne) वायरल रक्तस्रावी बुखार वाली बीमारी है।
- कारक: यह KFD वायरस के कारण होता है, जो फ्लेविवायरस (flavivirus) परिवार का हिस्सा है।
- प्रसार: यह मुख्य रूप से हेमाफिसलिस स्पिनिगेरा (Haemaphysalis spinigera) नामक टिक्स (किलनी) के माध्यम से फैलता है।
- प्रकोप: 1957 में कर्नाटक में पहली बार पहचाने जाने के बाद, यह अब कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, गोवा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फैल चुका है।
‘मंकी फीवर’ क्यों कहा जाता है?
इसे ‘मंकी फीवर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि जंगलों में बंदरों की मौत अक्सर इस बीमारी के फैलने का पहला संकेत होती है। जब संक्रमित टिक इंसानों को काटते हैं, तो यह वायरस मनुष्यों में फैल जाता है, जिससे तेज बुखार, सिरदर्द और गंभीर मामलों में रक्तस्राव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


