RBI और यूरोपीय प्रतिभूति एवं बाजार प्राधिकरण (ESMA) के बीच ऐतिहासिक समझौता
यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के अध्यक्षों की हालिया भारत यात्रा के दौरान, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और यूरोपीय प्रतिभूति एवं बाजार प्राधिकरण (ESMA) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
MoU का मुख्य उद्देश्य
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का प्राथमिक लक्ष्य क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) और अन्य RBI-विनियमित सेंट्रल काउंटरपार्टीज (CCPs) को ESMA द्वारा औपचारिक मान्यता दिलाना है। यह समझौता हस्ताक्षर की तिथि से प्रभावी हो गया है और अनिश्चित काल के लिए लागू रहेगा।
CCIL: भारतीय वित्तीय प्रणाली की रीढ़
2001 में स्थापित CCIL, एक केंद्रीय प्रतिपक्ष (Central Counterparty – CCP) है जो विभिन्न वित्तीय साधनों के लिए क्लियरिंग और सेटलमेंट सेवाएँ प्रदान करता है।
CCIL की मुख्य भूमिकाएं और सेवाएँ:
- दायरा: यह सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec), मुद्रा बाजार (Money Market), विदेशी मुद्रा (Forex) और OTC डेरिवेटिव्स के लिए सेटलमेंट प्रदान करता है।
- QCCP मान्यता: 2014 में RBI द्वारा इसे ‘क्वालिफाइड सेंट्रल काउंटरपार्टी’ (QCCP) के रूप में मान्यता दी गई थी।
- सुरक्षा और स्थिरता: इसका मिशन काउंटरपार्टी और सेटलमेंट जोखिम को कम करके वित्तीय स्थिरता और दक्षता को बढ़ावा देना है।
विशेष मंच और सेवाएँ
CCIL केवल सेटलमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाजार की जरूरतों के अनुसार आधुनिक सेवाएं भी देता है:
- SARVAM प्लेटफॉर्म: गैर-केंद्रीय रूप से क्लियर किए गए डेरिवेटिव्स (NCCDs) के लिए मूल्यांकन (Valuation), मार्जिनिंग, संपार्श्विक प्रबंधन (Collateral Management) और जोखिम विश्लेषण सेवाएँ प्रदान करता है।
- पोर्टफोलियो कंप्रेशन: यह गैर-क्लियर किए गए रुपया ब्याज दर स्वैप (Interest Rate Swaps) के लिए समय-समय पर पोर्टफोलियो कंप्रेशन सेवाएँ देता है।
- ट्रेड रिपॉजिटरी (TR): CCIL ने 2007 में ही OTC डेरिवेटिव बाजार के लिए भारत की पहली रिपॉजिटरी शुरू की थी। वर्तमान में यह ब्याज दर, क्रेडिट, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स के साथ-साथ CD और CP जैसे मुद्रा बाजार साधनों के लिए ट्रेड रिपॉजिटरी संचालित करता है।


