भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

माननीय उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार (22 जनवरी) को मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित भोजशाला परिसर के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। न्यायालय ने आगामी बसंत पंचमी के अवसर पर परिसर में एक साथ पूजा और नमाज़ आयोजित करने की अनुमति दी है।

विवाद और वर्तमान व्यवस्था

11वीं सदी के इस स्मारक को लेकर विवाद दशकों पुराना है। वर्तमान में ASI के साथ हुए समझौते के तहत यहाँ एक निश्चित व्यवस्था लागू है:

  • मंगलवार: हिंदू समुदाय द्वारा पूजा अर्चना की जाती है।
  • शुक्रवार: मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज़ अदा की जाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: विद्या का केंद्र ‘भोजशाला’

धार शहर के केंद्र में स्थित यह परिसर ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का संगम है:

  • राजा भोज की विरासत: परमार वंश के राजा भोज (1000-1055 ईस्वी) को 72 कलाओं और शस्त्र विद्या की 36 शाखाओं का ज्ञाता माना जाता था। उन्होंने धार को शिक्षा के एक महान केंद्र के रूप में विकसित किया, जिसे ‘भोजशाला’ के नाम से जाना गया।
  • शिक्षा का मंदिर: मध्य प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, राजा भोज शिक्षा और साहित्य के प्रबल संरक्षक थे। दूर-दूर से छात्र अपनी बौद्धिक जिज्ञासा शांत करने के लिए यहाँ आते थे।
  • कमल मौला मस्जिद: इसी परिसर में प्रसिद्ध चिश्ती संत कमल अल-दीन का मकबरा भी स्थित है, जो निज़ामुद्दीन औलिया के अनुयायी थे।

न्यायालय का रुख

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश इस विवाद में एक नया अध्याय जोड़ता है, जहाँ कानून और परंपरा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है ताकि दोनों समुदाय अपनी धार्मिक आस्थाओं का पालन शांतिपूर्ण ढंग से कर सकें।

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